Posts

Showing posts from October, 2018

गुरु महिमा (चौपाई छन्द)

Image
गुरु महिमा(चौपाई छन्द) गुरु घासी के महिमा भारी। गावँय पंथी सब नर नारी। सादा झंडा सादा बानी। जैतखाम जी हवय निशानी।।1 सतनाम सबो भज लव भाई। मिट जाही सबके करलाई। मनखे मनखे एक समाना। सुमता ला जग मा बगराना।।2 पर नारी ला माता जानव। मात पिता ला सबके मानव। पथरा पूजे कुछ नइ पाहू गुरु पूजा मा सब तर जाहू।3 खुशी खुशी मा लावव मौका। करलव मंगल पंथी चौका। चलव सबो झन एके धारा सतनाम जपो सबले प्यारा।।4 लड़व कभू झन भाई भाई। सुमता मा जी हवय भलाई। महिनत के रोटी सब खावव। बाबा जी के गुन ला गावव।।5 नशापान ला तज लव भाई। येही आवय गा दुखदाई। रोष दोष ला अपन तियागव। सोवव झन गा अब तो जागव।।6 गुरू नाव हा पार लगाही। मनखे जिनगी सुफल बनाही घटघट मा सतनाम बसावव दू रोटी महिनत के खावव।।7 शब्द रचना डी.पी.लहरे बायपास रोड़ कवर्धा जिला कबीरधाम छत्तीसगढ़

चौपाई छन्द (श्रृंगार)

Image
चौपाई छन्द (श्रृंगार) तोर नाँव के दीया बरगे। आरो ले ले आँसू ढ़रगे। आबे कब तँय हमर दुवारी। मया तोर बर हावय भारी।। रस्ता तोरे जोहत रहिथँव। कतका दुख पीरा ला सहिथँव। सजँव तोर ब...

ददरिया

Image
(लड़का)--- सपना मा आके, तँय जगाये काबर ओ.. तोरे सुरता सताथे मोर मयारू.. तँय रोवाये काबर ओ.. तोरे सुरता सताथे मोर मयारू.. (लड़की)--- नदिया के तीर मा, तँय बलाये काबर गा.. दउड़े दउड़े मँय आयें...

चौपाई छन्द (दीपावली)

Image
साथी दीप जलाओ प्यारा। मिट जाये जग के अँधियारा।। रोटी कपड़ा और मिठाई। दीनों में भी बाँटो भाई।। हो जाये तन मन उजियारा। जगमग होवे दुनिया सारा।। अहंकार का करो बिदाई। मानुष ह...

करवा चौथ

Image
जनम जनम मैं साथ निभाऊँ रोज मैं करवा चौथ मनाऊँ!! मन की अपनी बात सुनाऊँ प्यार भरी मैं थाल सजाऊँ!! प्रियतम को मैं पास बुलाऊँ आँगन में मैं चाँद दिखाऊँ!! प्रेम की गंगा रोज बहाऊँ प्रे...

वफाओं के बदले(गज़ल)

Image
गज़ल वफ़ाओं के बदले वफ़ा चाहता हूँ मेरे दर्द दिल का दवा चाहता हूँ!! गुलशन में महके हमारी मोहब्बत मोहब्बत वाली वो हवा चाहता हूँ! रह रह के उठती है दिल में तरंगे मोहब्बत अपना जव...

बरवै छन्द

Image
शीर्षक (गाँव) सुग्घर लागत हावय,हमरो गाँव। बर पीपर के ठंडा,पावन छाँव।। नदिया नरवा बोहत,हावय धार। हरियर हरियर दिखथे,खेती खार।। कोयल कुहके कउँवा,करथे काँव। सुत उठ सब धरती के,प...

चौपई छन्द

Image
चौपई छन्द सुनव सखी रे मन के बात। रोवत रहिथँव दिन अउ रात। मिलही कब जोही के साथ। नवाँतेंव मँय अपने माथ।। कुलकत रहिथँव अपने आप। मिटय नइ मोर मन के ताप। बसे हवय आँखी मा प्यार। जोही आवय घर संसार।। सुन रे सखी बतावँव आज। मोर धनी बर करथँव साज। जाहूँ मँय सजना के द्वार। पाहूँ मँय हा मया अपार।। बिनती करथँव मँय कर जोर। भरही झोली अब तो मोर। जागत हावय मोरो भाग। गाहूँ दया मया के राग।। रचना डी.पी.लहरे

नइ हे ठिकाना

Image
नइ हे ठिकाना.. ए तन के गा नइ हे ठिकाना.. झन कर गरब गुमाना.. चार दिन के जिनगी हवय जी.. छोडे ला पर ही जमाना..1ll लगे हवय इंहा आना जाना.. जाये के दस हे बहाना.. दया मया ले जी लव जीनगी.. नइ मिलय ये खज...

छत्तीसगढ़ महतारी

Image
पईंया पखारँव तोर ओ, मोर छत्तीसगढ़ महतारी.. मँय गुन ला गावँव तोर ओ, मोर छत्तीसगढ़ महतारी..ll1 तोर कोरा मा जनम धरे, हम तोरेच लइका तान.. कोनो हवे ओ मजदूर बेटा, हवय कोनो ओ किसान..ll2 आरती उतारँव तोर ओ, मोर छत्तीसगढ़ महतारी.. महानदी अउ अरपा पैरी, चरण तोर ओ पखारय.. हरियर करय खेत खार, अउ जीव जन्तु ला तारय..ll3 मँय माथ नवावँव मोर ओ, मोर छत्तीसगढ़ महतारी.. हरियर हरियर जंगल झाड़ी, हवे नदी पहाड़ अउ घाटी.. तोर अंचरा मा सुख पाये सब, महमावत तोर ओ माटी..ll4 आशीष ला पावँव तोर ओ, मोर छत्तीसगढ़ महतारी.. भोरमदेव,सिरपुर ,चंपारण, राजीम बढ़ावय ओ मान.. गिरौदपुरी अउ दामाखेड़ा, हवय गुरू,कबीर के धाम..ll5 रोज फूल चढ़ावँव टोर ओ, मोर छत्तीसगढ़ महतारी.. दंतेश्वरी अउ चंद्रहासनी, मोर रतनपुर महामायी.. मंदिर मस्जिद चर्च गुरुद्वारा, मोर हवय इहाँ बमलाई..ll6 अंचरा मा खेलन तोर ओ, मोर छत्तीसगढ़ महतारी.. रचनाकार डी.पी.लहरे दिनाँक 06-10-18 बायपास रोड़ कवर्धा भोरमदेव साहित्यिक सृजन मंच कबीरधाम छत्तीसगढ़

रात हो जाए..

Image
ये जुल्फें यूँ ना बिखराओ.. कसम से रात हो जाए.. क्यूँ आँखें बंद करती हो.. नयन से बात हो जाए..ll1 ये चेहरा है या कोई.. चाँद का टुकड़ा.. देखता ही रहूँ हरदम.. यूँ तेरे चाँद सा मुखड़ा..ll2 सनम अब ना स...

मुक्तक भ्रष्टाचार

Image
मुक्तक भ्रष्टाचार अब तुम भारत छोड़ के, भाग जाओ रे भ्रष्टाचार । बनाओ मत किसी को, अब तुम गुनहगार।।1 अमन शांति हो चमन में, सुन रे अत्याचार। बने ना कोई मेरे देश में, अब तो रे दागदार ।।2 घर घर वोट माँग के, बन बैठा सरकार। देख के मुक रह गये, होता है अत्याचार।।3 लटक गये फाँसी में, देश के पालनहार। फिर भी है ख़ामोश, बैठा फ़रेबी थानेदार।।4 सिर काट लेते विदेशी, लड़ते हैं पहरेदार। छप के रह जाती है बस, वीरता के अख़बार।।5 शब्द रचना डी.पी.लहरे भोरमदेव साहित्यिक सृजन मंच कबीरधाम छत्तीसगढ़

राम शबरी

उल्लाला छंद सीता जी के खोज मा,निकले राहय राम जी। मिलगे शबरी राह मा,पा गे शबरी नाम जी।।1 सादर चरण पखार के,शबरी शीश नवाय जी। राम लखन ला पाइ के,जीवन सुफल बनाय जी।।2 शबरी नामक भीलनी,...