करवा चौथ
जनम जनम मैं साथ निभाऊँ
रोज मैं करवा चौथ मनाऊँ!!
मन की अपनी बात सुनाऊँ
प्यार भरी मैं थाल सजाऊँ!!
प्रियतम को मैं पास बुलाऊँ
आँगन में मैं चाँद दिखाऊँ!!
प्रेम की गंगा रोज बहाऊँ
प्रेम राग सदा गुनगुनाऊँ!!
प्रिय!दर्शन निस दिन पाऊँ
अमर प्रेम में मैं बंध जाऊँ!!
हर जनम में प्रिय को पाऊँ
पति देव का मैं गुण गाऊँ!!
प्रेम सुधा मैं नित बरसाऊ
पति देव का मन हरसाऊँ!!
सुख दुःख में साथ निभाऊँ
सज के प्रिय में बस जाऊ!!
ऐसा करवा चौथ मनाऊँ
ऐसा करवा चौथ मनाऊँ!!
शब्द चयन
डी.पी.लहरे
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