नइ हे ठिकाना

नइ हे ठिकाना..

ए तन के गा नइ हे ठिकाना..
झन कर गरब गुमाना..
चार दिन के जिनगी हवय जी..
छोडे ला पर ही जमाना..1ll

लगे हवय इंहा आना जाना..
जाये के दस हे बहाना..
दया मया ले जी लव जीनगी..
नइ मिलय ये खजाना..2ll

काल रोके मा रुकय नहीं..
गा लव मया के जी गाना..
मनखे धरम सब ला बड़े हे..
सब ला हिरदे लगाना..3ll

पर पीरा ला अपन जानव..
झन कोनो ला रोवाना..
हँसी खुशी ले जम्मो राहव..
हँस के सब ला हँसाना..4ll

सरग नरख सब इंहे हवय..
मन ला झन भटकाना..
जइसे करबे तइसे पाबे..
करम बिना कहाँ खाना..5ll

शब्द रचना
डी.पी.लहरे
By dplahre87@gmail.com

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