मुक्तक भ्रष्टाचार

मुक्तक
भ्रष्टाचार

अब तुम भारत छोड़ के,
भाग जाओ रे भ्रष्टाचार ।
बनाओ मत किसी को,
अब तुम गुनहगार।।1

अमन शांति हो चमन में,
सुन रे अत्याचार।
बने ना कोई मेरे देश में,
अब तो रे दागदार ।।2

घर घर वोट माँग के,
बन बैठा सरकार।
देख के मुक रह गये,
होता है अत्याचार।।3

लटक गये फाँसी में,
देश के पालनहार।
फिर भी है ख़ामोश,
बैठा फ़रेबी थानेदार।।4

सिर काट लेते विदेशी,
लड़ते हैं पहरेदार।
छप के रह जाती है बस,
वीरता के अख़बार।।5

शब्द रचना
डी.पी.लहरे
भोरमदेव साहित्यिक
सृजन मंच कबीरधाम छत्तीसगढ़

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