चौपाई छन्द (श्रृंगार)

चौपाई छन्द (श्रृंगार)

तोर नाँव के दीया बरगे।
आरो ले ले आँसू ढ़रगे।
आबे कब तँय हमर दुवारी।
मया तोर बर हावय भारी।।

रस्ता तोरे जोहत रहिथँव।
कतका दुख पीरा ला सहिथँव।
सजँव तोर बर मँय हा सजना।
बदे हवँव गा मँय हा बदना।

जनम जनम बर तोला पावँव।
जिनगी हमरो सुफल बनावँव।
आ जाना तँय मोर मयारू।
झन पीबे गा तँय हा दारू।।

बिना पति के महल अटारी।
सुन्ना सुन्ना लगथे भारी।
आजा जोही झन तड़पाना।
हमर मया के गावँव गाना।

तोर अगोरा हावय मोला।
संसो नइ हे का गा तोला।
आजा ना अब झन तरसाना।
दरसन दे अमरित बरसाना।।

जिनगी भर हम मजा उड़ाबो।
दया मया के दीप जलाबो।
आही जिनगी मा अंजोरी।
बँधे मया के राहय डोरी ।।

शब्द रचना डी पी लहरे
भोरमदेव साहित्यिक सृजन मंच
कबीरधाम छत्तीसगढ़

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