गुरु महिमा (चौपाई छन्द)

गुरु महिमा(चौपाई छन्द)

गुरु घासी के महिमा भारी।
गावँय पंथी सब नर नारी।
सादा झंडा सादा बानी।
जैतखाम जी हवय निशानी।।1

सतनाम सबो भज लव भाई।
मिट जाही सबके करलाई।
मनखे मनखे एक समाना।
सुमता ला जग मा बगराना।।2

पर नारी ला माता जानव।
मात पिता ला सबके मानव।
पथरा पूजे कुछ नइ पाहू
गुरु पूजा मा सब तर जाहू।3

खुशी खुशी मा लावव मौका।
करलव मंगल पंथी चौका।
चलव सबो झन एके धारा
सतनाम जपो सबले प्यारा।।4

लड़व कभू झन भाई भाई।
सुमता मा जी हवय भलाई।
महिनत के रोटी सब खावव।
बाबा जी के गुन ला गावव।।5

नशापान ला तज लव भाई।
येही आवय गा दुखदाई।
रोष दोष ला अपन तियागव।
सोवव झन गा अब तो जागव।।6

गुरू नाव हा पार लगाही।
मनखे जिनगी सुफल बनाही
घटघट मा सतनाम बसावव
दू रोटी महिनत के खावव।।7

शब्द रचना
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
जिला कबीरधाम छत्तीसगढ़

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