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Showing posts from May, 2018

बिसवास..

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बिसवाँस चल मुसकुराबो, बनेच खिलखिलाबो। जिंनगी के का हे बिसवास.. हँस के मजा उड़ाबो ।। चार दिन के जिंनगी तहाँ ले अँधियारी रात। जिंनगी के का हे बिसवास.. चल मेछराबो, बनेच फुदराबो...

दिल के नग़मे..

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विधा-गज़ल शीर्षक-दिल के नग़मे.. ................................. दिल के नग़मे मैं सुनाने जा रहा हूँ। तेरी ही गीत मैं गुन गुनाने जा रहा हूँ।। तुम ही हो खयालों में मेरे अब भी। ख़ाब मोहब्बत का सजाने जा रहा ह...

दिल की कश्ती ..

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दिल की कश्ती मजधार में उतारी। प्रेम की देवी तुम और मैं पुजारी।। समझो जी तुम मोहब्बत हमारी। क्या होती है दिल की बेकरारी।। तेरी ही चाह में जिन्दगी गुजारी। जी नहीं सकता बिन त...

बर्षा...

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बादर गरजय, पानी बरसय, संगी मिले बर जीवरा तरसय।। चमकत बिजली,जुड़ पुरवईया, आगे किसानी के दिन रे भईया।। हरियर हरियर डोली धनहा। होके मतौना नाचे मन हा।। झिमिर झामर चारो डहर, गिर...

सच और झूँठ

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साँच को आँच नहीं प्यारे... फिर क्यों हिम्मत हारें... चलती है दुनियाँ सच के सहारे... झूँठ से न कोई जिन्दगी गुजारें... साँच को आँच नहीं प्यारे... फिर क्यों हिम्मत हारें ... जीत होती है सच क...

तोर सुरता

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तोर सुरता घेरी बेरी आथे जोही मोला.. तोर चेहरा देख लेतेंव तरसत रथे चोला.. सपना म आके मोर जीव ल जलाथस, दुरिहा जाके  गोरी मन ल ओ रोवाथस। अइसे लगे तँय का? भुला जाबे मोला.. तोर सुरता घे...

धरती की पुकार..

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धरती की पुकार .. आज धरती ने पूछा आसमान से.. तु क्यों बरसता नहीं इत्मीनान से.. झूमों रे घटा छाओ रे बादल.. तरबतर हो धरा का आँचल.. हाल तो पूछो तरसते किसान से.. तु क्यो बरसता नहीं इत्मीना...

हमसफ़र

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हमसफ़र तेरी चंचल हँसते नज़र है, दिल दिवाना इस कदर है।। मतवाला हो गया दिल मेरा, ये तेरी आँखों का ही असर है।। आँखों की मदहोशियाँ बताती है जान तुम संग ही जिन्दगी बसर है।। झील सी ...

सच्ची नारी लगे..

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अधर मधुर मधुर, नयन कटारी लगे।। बदन गुलाब की पंखुड़ियाँ, लटें नागिन कारी लगे।। मधुवन सा यौवन खिला खिला, तु अल्हड़ मतवारी लगे।। चमके दाँत,महकते साँस, तु सच में राजकुमारी लगे।...

गरमी के जेवन..

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मही संग म बासी अब्बड़ सुहाथे, गोंदली मिरचा म भर पेट  खवाथे।। साग के का पुछबे सवाद संगी, आमा खोइला म रमकेलिया मिठाथे, मिरचा मसलहा तो देखे नइ जाय, तेलहा फुलहा मा पेट अगियाय।। ग...

मन के डोरी~~~

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कंगना,चुरी,खिनवा,पइरी, टोंड़ा मँय पहिरा लेतेंव। टूटय झन बिसवास के डोरी, तोर मया म तन उजरा लेतेंव।। बना के अपन सुवारी तोला, तोर संग भाँवर परा लेतेंव। तोर मया ल पा के मयारू, मोर दुख पीरा बिसरा लेतेंव।। लाली के लुगरा लाली के पोलखा, सेंदुर तोर माथ म लगा लेतेंव, बन जाते मोर हिरदे के रानी। मँय तोर संग जिनगी बसा लेतेंव।। मया पिरीत के बंधना म जोही, तोर संग मया बँधा लेतेंव। जीयत मरत के संग देवईया, तोला चीर के करेजा देखा लेतेंव।। आठो अंग म सोला सिंगार, सोन पुतरी कस तोला सजा लेतेंव। अमर हो जातीस हमर मया हर, मँय तोर संग जिनगी पहा लेतेंव।। शब्द रचना डी पी लहरे सर्वाधिकार सुरक्षित है Dplahre87@gmail.com

मदर्स डे

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मातृ दिवस माँ के बिना जिन्दगी अधूरी है, माँ है तो हर ख्वाहिश पुरी है।। माँ की दुआएँ रस मलाई है, माँ से ही जग में  भलाई है।। माँ ने मेरी जिन्दगी सजाई है, माँ से ही मैने जीवन पाई है...

कविता~काजल

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कविता..काजल.. तुम्हारे आँखों के काजल में, दिल को बहलाए हैं। अपने दिल के बादल में, एक चाँद को छुपाए हैं ।। सर से पाँव तक कयामत हो, तुम्हारे आगे चाँद भी शर्माए हैं। तुम्हारे ये मदहोश नज़र, मृग नयनी कहलाए हैं। । नाज़ुक लब,खुले जुल्फ ने, दिल मेरा धड़काए हैं। देखकर तुम्हारे कातिल अदा, जहाँ सारा ललचाए हैं। । गोरे गाल, और लाल लिबाज देखकर ,फूल भी मुरझाए हैं। चंचल मन,तन उज्जवल, खुदा ने इत्मीनान से बनाए हैं। । गले में चैन, रेशम की माला, माथे पे बिंदी लगाए हैं। कोमल सी दो कली गुलाब की, मंद मंद मुस्कराए हैं। । दंत धवल,चाँदी सी चमकते , सूरज भी घबराए हैं। उड़े जुल्फ तो बरसे बदरा , मेरे तन मन को हरसाए हैं ।। शब्द-रचना डी पी लहरे सर्वाधिकार सुरक्षित है Dplahre87@gmail.com

श्रृंगार रस

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आ रे धनी मोर.. तोरेच खातिर करत हँव सिंगार। आ रे जोही मोर.. तहीं मोर जीव के अधार ll कजरा लगायेंव सुग्घर माहुर मँय लगायेंव कान म बाली होंठ म लाली मँय सजायेंव, मोर जोड़ीदार ... तहीं मो...

होंठों पर मुस्कान ...

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गज़ल प्यारी होंठों पर मिठा सा मुस्कान दे दो। मैं भी ख़ुश रहूँ,तुम वो अहसान दे दो।। दूरियाँ,तन्हाइयाँ बेशक है हमारे बीच। तेरी यादों में डूबा रहूँ,वो पहचान दे दो।। लगता है 1दिन जैसे बरस बीत गये। प्रिये दिल मिलन की फरमान दे दो।। ज़हन पर नक़्श तुम्हारी है प्रिये। प्रेम क़ुबूल तो प्रेम का निशान दे दो।। ख़्वाब भरे आँखों को बहलाऊँ कैसे। देखूँ तुझे इन आँखों में अरमान दे दो।। दिल की बगिया न उजाड़ हमऩशी। महबूब इश्क़ के दरिया में उफान दे दो।। रचना-डी पी लहरे सर्वाधिकार सुरक्षित है Dplahre87@gmail.com

जरत हे दिन..

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जरत हे दिन... सूरूज ह आगी असन बरय, अउ जरत हे दिन..। तात हावा म देंह भुँजागे, सुते म परे नहीं निंद..।। तरबतर चूचवावत पछीना, पुरवईया लुकागे..। पियास के मारे परानी भटके, मुँह घलो सुखागे....

कविता

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शीर्षक-प्रेम गीत रूप की प्यासी आँखें दिल में अरमान है नज़र भर देखूँ तुझे ये तेरा अहसान है।। लुका छिपी न खेल चाँद की तरह आ करीब मेरी जान की तरह ।। दम भर की उजियाली दिखा दो मतव...

बेटी ल पढ़ाबो..

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चल भईया बेटी ल पढ़ाबो.. बेटी ल आघू बढ़ाबो रे बढ़ाबो.. चल भईया बेटी ल पढ़बो..2!! बेटी होथे सुख दुख के गहना पढ़ा लिखा लव मानव कहना...2 इस्कूल म भरती कराबो रे कराबो.. चल भईया बेटी ल पढ़बो..2!! प...

ख़ुद के लिए

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ख़ुद के लिए.... दिवाना हूँ मस्ताना हूँ और आशिकाना हूँ दिल में ख़ुशियों की उमंग है और शायराना हूँ  !!!! हँसते हँसाते गुजर रहा है जिन्दगी ख़ुशी से मैं ख़ुदा का नज़राना हूँ!!!! ख़ुदा के आगे नहीं मेरी हैसियत हँसी है मेरी खासियत मैं खुशियों का ठिकाना हूँ!!!! ख़ुदा का दिया सब कुछ मिला है दुआओं से ही जीवन मिला है मैं दुआओं का तराना हूँ!!!! फूलों से दोस्ती कांटों से यारी है मजे में दोस्तों जिन्दगी हमारी है मैं खुशबू का खजाना हूँ!!!! ख्वाब नहीं ये हकीकत है मुुुुझे सब की जरूरत है जो मुझे समझे ओ अफसाना हूँ!!! खुद के लिए क्या लिखूँ मैं कुछ नहीं मुझमें क्या देखूँ मैं नासमझ के लिए विराना हूँ!!!! जो समझे मेरी अंदाज़ जो समझे मेरी अल्फ़ाज़ मैं वही 20वी सदी का जमाना हूँ!! शब्द -रचना डी पी लहरे सर्वाधिकार सुरक्षित है Dplahre86@gmail.com

श्रृंगार रस

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तोर रूप म जादू भरे हे ये संवरेंगी, तोर बर मोर नैना गड़े हे ये रंगरेली। चंदा असन जुड़ जुड़ तोर मुस्काई, रसमलाई हरे सिरतोन तोर हँसाई। घटा घनघोर हे तोर करिया बाल, गुलाबी होट हे म...