गरमी के जेवन..


मही संग म बासी अब्बड़ सुहाथे,
गोंदली मिरचा म भर पेट  खवाथे।।

साग के का पुछबे सवाद संगी,
आमा खोइला म रमकेलिया मिठाथे,

मिरचा मसलहा तो देखे नइ जाय,
तेलहा फुलहा मा पेट अगियाय।।

गरमी के दिन मा तन अकबकाय, 
मन मोर भाजी बर अब्बड़  ललचाय।।

चेंच भाजी दही म अब्बड़ मजा आथे।।
खेड़हा ह,अमटाहा मा बनेच मिठाथे।।

तिवरा भाजी सुकसा, खाले बने भात,
बोइर संग काँदा भाजी खाले ताते तात।

लाल मिरचा संग लसुन के चटनी,
बोरे के संग म खाले भाजी खोटनी।

आलु, भांटा, चुरचूटीया के मजा ले।
अमारी भाजी लिरबुटहा के मजा ले।।

गोंदली भाजी संग डार चना के दार,
देखव छत्तीसगढ़िया  खाय  बारम्बार।

इढ़हर राँध ले बने हे कोंचई पान,
पताल के कड़ही म चना पिसान।।

राहेर के दार, संग आमा के अथान,
बोरे बासी खाले लइका अउ सियान।।

लिखइया-डी पी लहरे
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Dplahre87@gmail.com

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