बेटी ल पढ़ाबो..
चल भईया बेटी ल पढ़ाबो..
बेटी ल आघू बढ़ाबो रे बढ़ाबो..
चल भईया बेटी ल पढ़बो..2!!
बेटी होथे सुख दुख के गहना
पढ़ा लिखा लव मानव कहना...2
इस्कूल म भरती कराबो रे कराबो..
चल भईया बेटी ल पढ़बो..2!!
पढ़ लिख के बेटी नाँव कमाही
दुनो कूल के बेटी मान बढ़ाही..2!!
बेटी के सपना सजाबो रे सजाबो..
चल भईया बेटी ल पढ़बो..2!!
आनंद,मंगल म जिनगी बिताही
मईके,ससुरे के बने नता निभाही..2!!
बेटी के जिनगी बनाबो रे बनाबो..
चल भईया बेटी ल पढ़बो..2!!
सिक्छीत होही बेटी घर सुधरही
सिरतोन दुनो कूल के सेवा करही..2!!
अंधियारी ल मार भगाबो रे भगाबो..
चल भईया बेटी ल पढ़बो..2!!
सिक्छा देवव सब पुन कमा लव
बेटी अउ बेटा के भेद मिटा लव..2!!
बेटी के मान बढ़ाबो रे बढ़ाबो..
चल भईया बेटी ल पढ़बो..2!!
रचनाकार-डी पी लहरे
बायपास रोड कवर्धा
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com
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