कविता


शीर्षक-प्रेम गीत

रूप की प्यासी आँखें
दिल में अरमान है
नज़र भर देखूँ तुझे
ये तेरा अहसान है।।
लुका छिपी न खेल
चाँद की तरह
आ करीब मेरी
जान की तरह ।।
दम भर की उजियाली
दिखा दो मतवाली।।
फैले न काजल आँखों का
और होठों की लाली
उड़ने दो लटें काली काली
क्या साज है ओ सजने वाली ।।
ये मदहोश निगाहें सम्हाल
जिया धक से धड़के करे बेहाल ।।
ये तड़प ये शोखियाँ
जवानी,मदहोशियाँ
कयामत देखी मेरी आँखों ने,
बस करो न गिराओ बिजलियाँ।।
अब तेरे हुस्न की गीत बनाऊँगा
फिर मेरे सपनों की महफ़िल सजाऊँगा
झूम झूम के प्रेम गीत गाऊँगा।।

शब्द -रचना डी पी लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
Dplahre86@gmail.com

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