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Showing posts from September, 2018

मया पिरीत

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जिनगी के दिन चार ओ, कर ले संगी प्यार ओ। मया मा संगे जीबो मरबो, मया पिरीत हे सार ओ।।1 देख ले छाती चीर के तैंहा, सिरतोन मया अपार ओ। सुख दुख मा संगे रहिबो, जरय चाहे ये संसार ओ।2 हर जनम बर मिले तैं मोला, मया के लगे बजार ओ। राख बने झन छूटय जोही, हमर मया के तार ओ।।3 तैं मोर आवस प्रेम के नइयाँ, अउ मँय तोर पतवार ओ। तहीं हा आवच रे संगवारी, मोर जिनगी के बहार ओ।।4 सुन दीवानी ये जिनगी भर, पाबे मया दुलार ओ। तन सांसा मा राखेंव तोला, तहीं हा जिनगी अधार ओ।।5 छूटय झन मया के बंधना, तँय हस ता रोज तिहार ओ। हर जनम बर अमर हो जाही, रही मया पिरीत हमार ओ।।6 शब्द रचना डी.पी.लहरे सर्वाधिकार सुरक्षित है by dplahre87@gmail.com

बिदाई(दोहा छन्द)

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*बिदाई* *दोहा छन्द* मेरी आँगन छोड़ कर,चली गई ओ दूर। बेटी मेरी आज तो, साजन घर मशहूर।।1 लोरी गा के खूब मैं, जगता सारी रात। बचपन के नखरा सहा,माना मैं हर बात।।2 बेटी मेरी जान थी,चली गई सस...

का के पीतर पाख

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दाई ददा ला जियत भर, तँय अपने संग मा राख। कर ले पूजा जीयत भर, मरे मा का के पीतर पाख।। गंगा जी मा जाके तँय, पिण्डा ला पराये जी, रुपिया पैसा दान देके, पण्डा मेर ठगाये जी।। रंग रंग के खवा जीयत मा, मन मा बने बिचार राख.. मरे मा का के पीतर पाख.. अपन सुवारथ मा संगी, अपने खरचा ला बढ़ाये। आनी बानी राँध राँध के मरे पीतर ला चढ़ाये।। जीते जीयत दाई ददा बर संगी पैसा ला तँय राख.. मरे मा का के पीतर पाख.. पैसा नहीं ता करजा लेके, सब जिनीस ला बिसाये। फायदा होगे दुकानदार के, तँय हा जी का पाये?? सोंच ले अब तो संगी तँय, हँसी खुशी परिवार राख.. मरे मा का के पीतर पाख.. दाई ददा के मान कर, जीयत मा कर ले सेवा। मरे मा छप्पन भोग देबे, ता कुकुर खाही मेवा। दाई ददा ला संग मा राख.. मरे मा का के पीतर पाख.. शब्द रचना डी.पी.लहरे

बचपन

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कभी संभल के चलते, कभी गिर जाया करते थे। कभी रोते हँसते रहते, कभी गीत गाया करते थे।। भागम-भाग नहीं था, निश्चिंत जिया करते थे। कोई चिंता फिकर नहीं थी, हम खूब मजा करते थे।। कभी मम्मी पापा मिलकर, हमें डाँट दिया करते थे। कभी उधम मचाते गिरते, तो हाथ दिया करते थे।। बचपन की नादानी में, शैतानी किया करते थे। दादी-दादा नानी-नाना, सयानी किया करते थे।। अठन्नी चवन्नी रुपिया, हम माँग लिया करते थे मुट्ठी में सिक्का हम तो, जी बाँध लिया करते थे।। मिल कर घर में रहते, हर काम किया करते थे। कभी गली मोहल्ले जाके, परेशान किया करते थे।। कभी सैर सपाटे करते, रोज खेल लिया करते थे। फिर घर में पड़ते चाँटें, हम झेल लिया करते थे।। कभी नदी तालाब में जाते, हम मस्ती में खूब नहाते। दोस्तों से कभी झगड़ा, कभी प्यार दिया करते थे।। क्या लिखूँ बचपन की बातें, क्या क्या किया करते थे। बचपन में भी हम तो, जवानी में जिया करते थे। बस याद रह गई बचपन, अब याद किया करते है। आ जाये फिर से बचपन, फरियाद किया करते हैं।। शब्द रचना डी.पी.लहरे

गुरु महिमा..

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सत पुरूष के आरती  होवथे दिन अउ रात। धरती मा सतनाम गूंजे, पहुँचत हे आगास।।1ll धन्य धन्य हे गिरौदपुरी गुरु घासी लेय अवतारी। मंहगु दास घर जनम धरे, अमरौतिन महतारी।।2ll माँदर झाँझ बाजत हे, मनखे पंथी नाँचय जी। गुरु जी के संदेश ला, मिल सबो झन बाँटय जी।।3ll सतनाम हा अमर रहे, हे मंहगु के लाला। मन मा सतनाम बसे, तोर महिमा निराला।।4ll मनखे मनखे एक हे, कहिके सबला तारे। भटकत हंसा ला बाबा, गुरु घासी तँय उबारे।।5ll झूँठ नाम मा हे अँधियार, सतनाम हवय जी सार। जे जन जपे सतनाम ला, मिले ओला सुख अपार।। 6ll रचनाकार डी.पी. लहरे बायपास रोड़ कवर्धा दिनाँक 31-07- 18

कैसे कह दूँ की जमाने में ..

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विधा-गज़ल शीर्षक-कैसे कह दूँ की.. कैसे कह दूँ की जमाने में तेरा नाम नहीं। तेरी चाहतों में हूँ डूबा और कोई काम नहीं।।1ll मिली है जब से नज़र जान ए वफा, बेचैन दिल को भी आराम नहीं।।2ll इस तरह देख मेरा जलता बदन, मैं हूँ आशिक कोई गुलाम नहीं।।3ll तेरी सूरत में नहीं आज शिकन, मेरी चाहतों का सनम कोई पैगाम नहीं।।4ll आ जरा देख ले मेरे दिल की लगन, मेरी हसरतों को तेरा सलाम नहीं।।5ll अश्कों से भरा है मेरे अनमोल नयन, राह तकता हूँ तेरी जिसकी कोई शाम नहीं।।6ll कैसे कह दूँ की जमाने में तेरा नाम नहीं। तेरी चाहतों में हूँ डूबा और कोई काम नहीं.. शब्द रचना डी.पी.लहरे सर्वाधिकार सुरक्षित है By dplahre87@gmail.com

अभिलाषा

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शीर्षक-अभिलाषा मेरे मन की है अभिलाषा, दीन दुखियों का मान करूँ। दुनिया चाहे कहे तमासा, सब का मैं सम्मान करूँ।। जीवन में ना आए निराशा, गुरु का मैं गुणगान करूँ। मन में सदा जगा के आशा, मात पिता का बखान करूँ।। पलट जाए जीवन का पाशा, कभी ना मैं अभिमान करूँ। आए ना मन में हताशा, किसी को ना परेशान करूँ।। मेरे मन की है अभिलाषा, जीवन भर सत काम करूँ। खुशी का सबको दूँ दिलासा, दुनिया में गुरु का नाम करूँ।। रचनाकार द्वारिका प्रसाद लहरे कबीरधाम छत्तीसगढ़

गज़ल

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मेरी आँखों में ... चेहरा तेरा मुझे कमाल नज़र  आता है, मेरी आँखों में बेमिसाल नज़र  आता है।। क्या कहें तेरी रुप की हम जादूगरी, काया संगमरमर सी ताज़ नज़र  आता है।। आँख मल मल देखा ...

ताज बना देंगे..

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हम तेरे लिए दिलबर, कई ताज बना देंगे। तुम दिल की धड़कन हो, तुझे मुमताज बना देंगे।।1 जिस डगर पे तू जाए, वहाँ फूल बिछा देंगे। जिस चमन में तू निकले, हम  गुल खिला देंगे।।2 आ प्रेम की द...

चंदा असन चेहरा

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चंदा असन चेहरा.. श्रृंगार रस मस रंग के लुगरा गोरी, पोलखा लाली लाली हे। चंदा असन चेहरा दिखे, आँखी हा कजराली हे।।1 खोपा मा फूल गजरा, गर मा पहिरे रुपिया। जीव ला ले डारे गोरी, तोर मो...