गज़ल
मेरी आँखों में ...
चेहरा तेरा मुझे कमाल नज़र आता है,
मेरी आँखों में बेमिसाल नज़र आता है।।
क्या कहें तेरी रुप की हम जादूगरी,
काया संगमरमर सी ताज़ नज़र आता है।।
आँख मल मल देखा तुझे ओ जान ए वफा,
तुझमें ही सुलझी हुई राज नज़र आता है।।
सुरत है ये या है चाँद आसमान की,
तू मेरे मुकम्मल खयाल नज़र आता है।।
मेरे लिए ही जमीं पे भेजा है खुदा ने तुझे,
तुझमे ही प्रेम की मिसाल नज़र आता है।।
आ भी जा कि तड़पता है दीद को "लहरे"
बिन तेरे दिल मेरा बेहाल नज़र आता है।।
रचनाकार
डी.पी.लहरे
By dplahre87@gmail.com
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