का के पीतर पाख
दाई ददा ला जियत भर,
तँय अपने संग मा राख।
कर ले पूजा जीयत भर,
मरे मा का के पीतर पाख।।
गंगा जी मा जाके तँय,
पिण्डा ला पराये जी,
रुपिया पैसा दान देके,
पण्डा मेर ठगाये जी।।
रंग रंग के खवा जीयत मा,
मन मा बने बिचार राख..
मरे मा का के पीतर पाख..
अपन सुवारथ मा संगी,
अपने खरचा ला बढ़ाये।
आनी बानी राँध राँध के
मरे पीतर ला चढ़ाये।।
जीते जीयत दाई ददा बर
संगी पैसा ला तँय राख..
मरे मा का के पीतर पाख..
पैसा नहीं ता करजा लेके,
सब जिनीस ला बिसाये।
फायदा होगे दुकानदार के,
तँय हा जी का पाये??
सोंच ले अब तो संगी तँय,
हँसी खुशी परिवार राख..
मरे मा का के पीतर पाख..
दाई ददा के मान कर,
जीयत मा कर ले सेवा।
मरे मा छप्पन भोग देबे,
ता कुकुर खाही मेवा।
दाई ददा ला संग मा राख..
मरे मा का के पीतर पाख..
शब्द रचना
डी.पी.लहरे
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