मया पिरीत

जिनगी के दिन चार ओ,
कर ले संगी प्यार ओ।
मया मा संगे जीबो मरबो,
मया पिरीत हे सार ओ।।1

देख ले छाती चीर के तैंहा,
सिरतोन मया अपार ओ।
सुख दुख मा संगे रहिबो,
जरय चाहे ये संसार ओ।2

हर जनम बर मिले तैं मोला,
मया के लगे बजार ओ।
राख बने झन छूटय जोही,
हमर मया के तार ओ।।3

तैं मोर आवस प्रेम के नइयाँ,
अउ मँय तोर पतवार ओ।
तहीं हा आवच रे संगवारी,
मोर जिनगी के बहार ओ।।4

सुन दीवानी ये जिनगी भर,
पाबे मया दुलार ओ।
तन सांसा मा राखेंव तोला,
तहीं हा जिनगी अधार ओ।।5

छूटय झन मया के बंधना,
तँय हस ता रोज तिहार ओ।
हर जनम बर अमर हो जाही,
रही मया पिरीत हमार ओ।।6

शब्द रचना
डी.पी.लहरे
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dplahre87@gmail.com

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