गुरु महिमा..


सत पुरूष के आरती 
होवथे दिन अउ रात।
धरती मा सतनाम गूंजे,
पहुँचत हे आगास।।1ll

धन्य धन्य हे गिरौदपुरी
गुरु घासी लेय अवतारी।
मंहगु दास घर जनम धरे,
अमरौतिन महतारी।।2ll

माँदर झाँझ बाजत हे,
मनखे पंथी नाँचय जी।
गुरु जी के संदेश ला,
मिल सबो झन बाँटय जी।।3ll

सतनाम हा अमर रहे,
हे मंहगु के लाला।
मन मा सतनाम बसे,
तोर महिमा निराला।।4ll

मनखे मनखे एक हे,
कहिके सबला तारे।
भटकत हंसा ला बाबा,
गुरु घासी तँय उबारे।।5ll

झूँठ नाम मा हे अँधियार,
सतनाम हवय जी सार।
जे जन जपे सतनाम ला,
मिले ओला सुख अपार।।6ll

रचनाकार
डी.पी. लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 31-07-18

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