कैसे कह दूँ की जमाने में ..

विधा-गज़ल
शीर्षक-कैसे कह दूँ की..

कैसे कह दूँ की जमाने में तेरा नाम नहीं।
तेरी चाहतों में हूँ डूबा और कोई काम नहीं।।1ll

मिली है जब से नज़र जान ए वफा,
बेचैन दिल को भी आराम नहीं।।2ll

इस तरह देख मेरा जलता बदन,
मैं हूँ आशिक कोई गुलाम नहीं।।3ll

तेरी सूरत में नहीं आज शिकन,
मेरी चाहतों का सनम कोई पैगाम नहीं।।4ll

आ जरा देख ले मेरे दिल की लगन,
मेरी हसरतों को तेरा सलाम नहीं।।5ll

अश्कों से भरा है मेरे अनमोल नयन,
राह तकता हूँ तेरी जिसकी कोई शाम नहीं।।6ll

कैसे कह दूँ की जमाने में तेरा नाम नहीं।
तेरी चाहतों में हूँ डूबा और कोई काम नहीं..

शब्द रचना
डी.पी.लहरे
सर्वाधिकार सुरक्षित है
By dplahre87@gmail.com

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