बिदाई(दोहा छन्द)
*बिदाई*
*दोहा छन्द*
मेरी आँगन छोड़ कर,चली गई ओ दूर।
बेटी मेरी आज तो, साजन घर मशहूर।।1
लोरी गा के खूब मैं, जगता सारी रात।
बचपन के नखरा सहा,माना मैं हर बात।।2
बेटी मेरी जान थी,चली गई ससुराल।
रोती होगी याद कर,जाने कैसा हाल।।3
रहती थी वो शान से, करती ना अभिमान।
रीत निभाई आज ओ,नहीं रही नादान।।4
सहेलियों से खेलती, लुका छिपी के खेल।
सोंचे कैसे होय अब,उन सखियों से मेल।।5
बेटी बरगद छाँव थी,लाडो थी संसार।
अब साजन की डेहरी,देती खुशी अपार।।6
सास ससुर परिवार की,रखते पूरा ध्यान।
धर्म निभाकर बेटियाँ, पाते सबसे मान।।7
रहे सलामत बेटियाँ,सुन विनती भगवान।
हे प्रभु सुख देना सदा,माँगू ये वरदान।।8
रचनाकार
डी.पी.लहरे
By dplahre87@gmail.com
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