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Showing posts from November, 2018

घरवाली

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विधा-कविता शीर्षक-घरवाली  ------------------------------ लड़की भोली भाली है, अदा उसकी निराली है। करती है बेचैन मुझे, हाँ वो ही दिलवाली है। हरपल यादों में रहती, यूँ ना जाने वाली है। वो मुझपे प्यार लुट...

कंचन काया

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छप्पय छंद श्रृंगार रूप दिये भगवान,पाय तँय कंचन काया। सबके मन ला भाय,बँधे सब तोरे माया। तोर गुलाबी होंठ,बहय मन्दरस के धारा। आँखी कजरा आँज, चलाये दिल मा आरा। बेनी खोंचे मोंगरा,महर महर ममहाय ओ। करिया चूँदी तोर हे,नागिन कस लहराय ओ। डी.पी.लहरे

सपना

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वियोग श्रृंगार सपना ला तोरे सजाये हवँव गा, हिरदे मा तोला बसाये हवँव गा.. रस्ता तोरे देखँव मँय टुकूर टुकूर, सुरता मा लागय मोला भुकूर भुकूर.. आबे मयारू तँय मोर अंगना, तोर नाँव के ...

बेनी फूल गजरा

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मनहरण घनाक्षरी-श्रृंगार बेनी फूल गजरा हे,आँखी आँजे कजरा हे। होंठ दिखे चूक लाल,करे ओ सिंगार हे। माथा मा टिकुलिया हे,चमकत चंदा जस। गोरी नारी रूप सोहे,लगथे बहार हे।। मुख हे गु...

श्रृंगार- रूप घनाक्षरी

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रूप नगर के रानी,मँय गँवईं के राजा। धर के गँड़वा बाजा,ले जाहूँ घर मा मोरll मया के दीया बार के,खड़े हवच दुवारी, बनजा मोर सुवारी,रूप मोहनी हे तोरll रूप के जादू मंतर,मार के रे निरमोही, बनके मयारू जोही,तँय ले ले मोरो सोरll रूप बसे हिरदे मा,आँखी मा चेहरा झूले, मन मा फुलवा फूले,बँधागे मया के डोरll रचनाकार डी.पी.लहरे बायपास रोड कवर्धा दिनाँक 16-11-18

श्रृंगार-मनहरण घनाक्षरी

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मनहरण घनाक्षरी (कवित्त छन्द) कान मा पहिरे बाली,लगाय होंठ मा लाली, हाथ मा चूरी कँगना,करे ओ सिंगार हेll आँखी मा कजरा आँजे,मुच मुच गोरी हाँसे, माथा मा टिकली साजे,नयन कटार हेll बाँह प...

भारत माँ के बेटा (आल्हा छन्द)

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भारत माँ के बेटा आवँव,वंदत हँव दूनो कर जोर। ये माटी मा माथ नवावँव,चंदन हे भुइयाँ हा मोर।।1 वीर सिपाही मँय बलिदानी,खड़े हवँव मँय छाती तान। बइरी मन ला मार भगाहूँ,ले लेहूँ बइरी के जान।।2 भारत माँ के मान बढ़ाहूँ, ये भुइयाँ के मँय रखवार।। आँखी कोनों देखाही ता,धरे हवँव रे मँय हथियार।।3 बइरी बर लाठी बन जाहूँ,हितवा मन बर बनँव मितान। दुख पीरा मा संग निभावँव,भारत माँ के गावँव गान।।4 भारत माँ ला सरग बनाहूँ,दया मया के बोहय धार। भाई चारा सदा रहय जी,सबके करहूँ मँय उपकार।।5 सच्चा बेटा मँय हा बनके,भारत माँ के रखहूँ लाज। ये माटी मा जनम धरे हँव,सेवा करके करिहँव साज।।6 रचनाकार डी.पी.लहरे बायपास रोड़ कवर्धा दिनाँक 12-11-18 मोबा-7898690867

चौपई छन्द जयकरी(श्रृंगार)

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तेरे महके काले बाल। तेरे गोरे गोरे गाल। तेरी है मस्तानी चाल। तेरे आगे सब कंगाल.. तेरे आगे सब कंगाल.. तेरे होंठ रसीले लाल। उस पर तिल भी लगे कमाल। तेरी नैन नशीले जाल। तेरे आगे सब कंगाल.. तेरे आगे सब कंगाल.. तेरी उमर अठारह साल। काहे करती सनम बवाल। इक तू ही तो मालामाल। तेरे आगे सब कंगाल.. तेरे आगे सब कंगाल.. बजी प्रेम की हरदम ताल। मेरी बातों को ना टाल। मेरी तू ही आटा दाल। तेरे आगे सब कंगाल.. तेरे आगे सब कंगाल.. तू गुलाब की लगती डाल। असर प्यार का दिल में पाल। प्यारी हो जा मेरे नाल। तेरे आगे सब कंगाल.. तेरे आगे सब कंगाल.. रचनाकार डी.पी.लहरे दिनाँक 08-11-18

तेरी याद

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हरपल तेरी याद में, रोज मैं"जिया"करता हूँll पाया जबसे तुझको प्यारी, तेरा नाम"लिया"करता हूँll आबाद रहे मोहब्बत, फरियाद"किया"करता हूँll जन्नत मुझको देने वाली, दुआ तुझे"दिया"करता हूँll ...

सजल (साही स्नान )

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*लबों पे रहने दो मुस्कान,* *यही है मेरी अब अरमान।।* *हवा में उडने दो जुल्फ अब,* *करो जी मुझपे तुम अहसान।।* *लबों पे है मधुरस की धार,* *अंग है महके फूल समान।।* *समा जाए दिल तुझमे यार,* *काश मिल जाता वो वरदान।।* *देख लेने दो तुझे जी भर,* *हमारा दिल तो है नादान।।* *अदाएँ अब दिखलाओ प्रिया* *प्रेम की अब तुम छेड़ो तान।।* *प्रिया तुम मैं हूँ तेरा सजन,* *एक दूजे का हैं हम जान।।* *करो तुम बारिश अब प्रेम की,* *करेंगे दोनों साही स्नान।।* शब्द रचना डी.पी.लहरे बायपास रोड़ कवर्धा