चौपई छन्द जयकरी(श्रृंगार)
तेरे महके काले बाल।
तेरे गोरे गोरे गाल।
तेरी है मस्तानी चाल।
तेरे आगे सब कंगाल..
तेरे आगे सब कंगाल..
तेरे होंठ रसीले लाल।
उस पर तिल भी लगे कमाल।
तेरी नैन नशीले जाल।
तेरे आगे सब कंगाल..
तेरे आगे सब कंगाल..
तेरी उमर अठारह साल।
काहे करती सनम बवाल।
इक तू ही तो मालामाल।
तेरे आगे सब कंगाल..
तेरे आगे सब कंगाल..
बजी प्रेम की हरदम ताल।
मेरी बातों को ना टाल।
मेरी तू ही आटा दाल।
तेरे आगे सब कंगाल..
तेरे आगे सब कंगाल..
तू गुलाब की लगती डाल।
असर प्यार का दिल में पाल।
प्यारी हो जा मेरे नाल।
तेरे आगे सब कंगाल..
तेरे आगे सब कंगाल..
रचनाकार
डी.पी.लहरे
दिनाँक 08-11-18
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