श्रृंगार-मनहरण घनाक्षरी

मनहरण घनाक्षरी
(कवित्त छन्द)

कान मा पहिरे बाली,लगाय होंठ मा लाली,
हाथ मा चूरी कँगना,करे ओ सिंगार हेll

आँखी मा कजरा आँजे,मुच मुच गोरी हाँसे,
माथा मा टिकली साजे,नयन कटार हेll

बाँह पीठ मा गोदना,दाँत आवय बिजली,
गुरतुर भाखा बोले,सजे मोती हार हेll

करिया हावय चूँदी,चेहरा लागय चंदा,
सज के गोरी देखय,करे इंतज़ार हेll

रचनाकार
डी.पी.लहरे
बायपास रोड कवर्धा
दिनाँक 14-11-18

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