कंचन काया

छप्पय छंद श्रृंगार

रूप दिये भगवान,पाय तँय कंचन काया।
सबके मन ला भाय,बँधे सब तोरे माया।
तोर गुलाबी होंठ,बहय मन्दरस के धारा।
आँखी कजरा आँज, चलाये दिल मा आरा।
बेनी खोंचे मोंगरा,महर महर ममहाय ओ।
करिया चूँदी तोर हे,नागिन कस लहराय ओ।

डी.पी.लहरे

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