घरवाली
विधा-कविता
शीर्षक-घरवाली
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लड़की भोली भाली है,
अदा उसकी निराली है।
करती है बेचैन मुझे,
हाँ वो ही दिलवाली है।
हरपल यादों में रहती,
यूँ ना जाने वाली है।
वो मुझपे प्यार लुटाती,
प्यारी हिम्मत वाली है।
वो ही खुशियाँ है मेरी,
हाँ मेरी दीवाली है।
मेरी वो घर की लक्ष्मी,
सरस्वती वो काली है।
हरदम वो साथ निभाती,
सच मेरी घरवाली है।।
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शब्द रचना
डी.पी.लहरे
बायपास रोड कवर्धा
दिनाँक 30-11-18
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