*विधाता छंद--* *संयोग श्रृंगार* *जिया ला बान मारे* 1222...1222...1222..1222 जिया ला बान मारे ओ,कसम से तोर मुस्काई। सुरुज चंदा लजाये हे बही का तोर सुघराई।।1 चमकथे माथ के टिकली,खनकथे हाथ के चूरी। फबे हे ...
छत्तीसगढ़ी गज़ल श्रृंगार-गियाँ तैं मोर... 1222..1222..1222..1222 गियाँ तैं मोर जिनगानी, मया के तै कहानी ओ। करेजा चान के ले ले,मया के तैं निशानी ओ।।1 मिला नैना चला जादू,मया के गोठ कर ले ना। म या मौस...
दोहा .. शीर्षक--समाजिक समस्या.. (अँधविश्वास) नइ होवय जी टोनही,नइ हे भूत परेत। ये सब अँधविश्वास हे,मन ला राखव सेत।।1 झाड़ फूँक के नाँव मा,बइगा पैसा खाय। ठग मन ठगथें पेट बर,लोगन ला भ...
दोहा गीत~~ बन जा चंदा मोर तँय,बनँव सुरुज मैं तोर। जुग जुग रहिबो संग मा,मया पिरित रस घोर।। सात जनम ले संग ला,छोड़व नइ ईमान। मया हवय अनमोल ओ,थोरक तो पहिचान।। काय खवा के मोहनी,मन ला ...