छत्तीसगढ़ी गज़ल श्रृंगार
*विधाता छंद--*
*संयोग श्रृंगार*
*जिया ला बान मारे*
1222...1222...1222..1222
जिया ला बान मारे ओ,कसम से तोर मुस्काई।
सुरुज चंदा लजाये हे बही का तोर सुघराई।।1
चमकथे माथ के टिकली,खनकथे हाथ के चूरी।
फबे हे पाँव मा पैरी,गजब हे यार झनकाई।।2
गुलाबी होंठ के लाली,सजे हे कान मा बाली।
थकाथे मोर जिवरा ला,कमर के तोर लचकाई।।3
मया रस धार बोली मा,मया रस घोर डारे ओ।
लगे जस मोहनी जोंही,मुहूँ के तोर मटकाई।।4
नयन के तोर कजरा हा,कटारी मार देही का???
धड़कथे मोर चोला रे,बढ़ाथे मोर करलाई।।5
बदन हे तोर गोंदा फूल,तरसथे मोर मन भौंरा।
महकथे *द्वारिका* हा ओ,अजब हे तोर ममहाई।।6
छंदकार
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक-19-04-19
Comments