दोहालरी श्रृंगार

दोहालरी--मन मोहनी

तिहीं मोर ओ जोगनी,हिरदे के उजियार।
आ राधा मन मोहनी,जिनगी मोर सँवार।।1

गोरी तोरे रूप मा,चंदा घलो लजाय।
हरियर पहिरे हाथ के,चूरी ला खनकाय।।2

करिया बादर छाय जस,खुल्ला राखे बाल।
कर देही का बावरा,चिक्कन चिक्कन गाल।।3

कनिहा धरके हाथ मा,खड़े खड़े मुस्काय।
चुक हे लाली चेहरा,मन ला ओ भरमाय।।4

मन मंदिर ला साज के,टिकली माथ लगाय।
चटक मटक हे रेंगना,नखरा गजब दिखाय।।5

खोंचे दौना कान मा,महर महर ममहाय।
काजर वाले नैन हा,कहर अबड़ ओ ढ़ाय।।6

चुक हे लाली ओंठ हा,जस मधुरस बरसाय।
लागे फुलवा मोंगरा,मन भौंरा ललचाय।।7

पहिरे लुगरा पोलखा,मन ला गोरी भाय।
मीठ मीठ ओ बोल के,जादू तिहीं चलाय।।8

उड़बो मया अगास मा,बाँध मया के डोर।
बही चाँद के पार चल,मन होथे अब मोर।।9

उज्जर काया तोर हे,करदे तिहीं  अँजोर।
अपन बनाले मोहना,सदा रहँव मैं तोर।।10

रचनाकार
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 05-04-19
सर्वाधिकार सुरक्षित है byDplahre87@gmail.com

Comments

Popular posts from this blog

लक्ष्मण मस्तुरिहा

छत्तीसगढ़ महतारी

मरिया भात..