जगार सरसी
सरसी छंद
शीर्षक-जवान
उठव उठव गा अब तो भइया,
जागव वीर जवान,
तुँहर बाँह मा जोश भरे बर,आये नवा बिहान।।1
जे सोवय सो खोवत रहिथे,जागव पावव मान।
धरती माँ के जतन करे बर,देवव छाती तान।।2
जे जागय सो पावत रहिथे,महिनत करव मितान।
देखव अन उपजइया ला जी,
कइसे बोथे धान।।3
बासय कुकरा सब झन जागँय,
जागँय सबो किसान।
बइला नाँगर धरँय तुतारी,जाँय खेत खलिहान।।4
चिरई चुरगुन सब जागत हें,
आलस तजव जवान।
तुँहर बाँह मा जोश भरे हे,
तुँहरे हाथ कमान।।5
बनव सबो झन कमिया संगी,
बनहू तभे महान।
आलस मा कुछ नइ बन पावव,
जागव वीर जवान।।6
रचनाकार
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 08-01-19🙏🙏🙏
By dplahre87@gmail.com safety
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