दोहा गीत चंदा

दोहा गीत~~

बन जा चंदा मोर तँय,बनँव सुरुज मैं तोर।
जुग जुग रहिबो संग मा,मया पिरित रस घोर।।

सात जनम ले संग ला,छोड़व नइ ईमान।
मया हवय अनमोल ओ,थोरक तो पहिचान।।

काय खवा के मोहनी,मन ला हर ले मोर...
बनजा चंदा मोर तँय,बनँव सुरुज मैं तोर...ll1

चीर करेजा देख ले,तब होही बिसवास।
ये जिनगी हे तोर बर,रखले जोही आस।।

तिहीं मोर ओ सुंदरी,करले नैना चार।
मया पिरीत ला जान के,जिनगी बने गुजार।।

मया अमर हे जान ले,छुटे मया नइ डोर...
बनजा चंदा मोर तँय,बनँव सुरुज मैं तोर...ll2

मया बिना का काम के,कतको कर सिंगार।
मया पिरित के छाँव मा,बइठे हवँय हजार।

अपन मयारू मान ले,होगे हवस जवान।
काया के दिन चार हे,काबर हस अंजान।।

बरस मया मा आज तैं,बन बादर घनघोर...
बनजा चंदा मोर तँय,बनँव सुरुज मैं तोर...ll3

शब्द रचना
डी.पी.लहरे
बायपास रोड कवर्धा
दिनाँक 30-03-19

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