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Showing posts from February, 2022

गीत

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गीत.. *नायक* सोन परी सोन परी सोन परी हे..2 उतरे सरग ले सोन परी हे,सोन परी हे। करफू लगा देहे रे.. मुँगेली शहर मा,जम्मो डगर मा- हल्ला मचा देहे रे..2 सोन परी सोन परी सोन परी.. *नायिका* भींड़ लगे भींड़ लगे भींड़ लगे हे..2 आगू पिछू मोर भीड लगे हे भीड लगे हे-2 रूप के रानी हँव ना... मुँगेली शहर के जम्मो डगर मा गदर मचा देहूँ ना..2 भींड़ लगे भींड़ लगे भींड़ लगे..2 अंतरा(१) *नायक* तँय मस्तानी ओ,दिल के दिवानी ओ। माया हे तोर कहानी। *नायिका* मँय दिलवाली हँव,फूल के डाली हँव। रूप नगर के मँय रानी। मुँगेली शहर के जम्मो डगर मा बिजली गिरा देहूँ ना-2 *नायक+नायिका* सोन परी सोन परी सोन परी हे.. भींड़ लगे भींड़ लगे भीड़ लगे हे.. *नायक* तोर मुस्काई मा,तोर सुघराई मा। चंदा घलो हा लजाथे। *नायिका* कान के बाली मा,होठ के लाली मा। बैरी जमाना मोहाथे।। मुँगेली शहर के जम्मो डगर मा करफू लगा देहूँ ना.. *नायक* सोन परी सोन परी सोन परी हे *नायिका* भींड़ लगे भींड़ लगे भींड लगे हे

गीत

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गीत रोमांटिक श्रृंगार(12)रेस कहरवा तोर कंगाना खनके खनखन.. मोर दिल के बढ़ावय धड़कन.....2// तोर पाँव के पैरी गोरी--2// बाजत रहिथे छन छन.. तोर कंगना खनके खनखन.. मोर दिल के बढ़ावय धड़कन... अंतरा-(1) तोर तिरछी नजर मा जादू। जिंवरा करथे बेकाबू। तैं मुचमुच ले मुस्काये। मोर मन ला अब्बड़ भाये। तोर होंठ ले मँदरस झरथे..2// भींजत हे मोर तन मन.. तोर कंगना खनके खनखन.. मोर दिल के बढ़ावय धड़कन... अंतरा(2) तोर नैना हे कजरारी। मोर दिल मा चलाथे आरी।। तोर चमके लाली बिंदिया। मोर ले जाथे ओ निंदिया।। सरग सुंदरी सोन परी तैं..2// का देखबे ओ दरपन.. तोर कंगना खनके खनखन.. मोर दिल के बढाथे धड़कन... डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा

गीत

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गीत (50) कब आबे संगी रे,मोर मया के फुलवारी मा। तोर बिना जिनगी हे जइसे,घपटे अँधियारी मा। कब आबे संगी रे.. तोर बिना ओ लागे अब्बड़,गाँव गली हा सुन्ना। अंतस मा ओ ए सँवरेंगी,पीरा बाढ़य दुन्ना।। कटे सहीं अब लागे मोला-ए बिरहा के आरी मा। कब आबे संगी रे... तोर सुध मा ए पतरेंगी,तन ला खाथे घुन्ना। कइसे साहँव ए अंतस मा,पीरा होगे जुन्ना।। अइलाये हे मन बैरी हा-जीथौं जिनगी उधारी मा। कब आबे संगी रे... डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा छत्तीसगढ़

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गीत-(52)दादरा तैं तो परदेशी मैना,लेके मोर चैना कहाँ उडागे ओ मिलाके नैना..2 देखे बिना तोला गोरी-2तरसाथे नैना। तैं तो परदेशी मैना,लेके मोर चैना  कहाँ उडागे ओ मिलाके नैना..2 अंतरा-1 हिरदे के कुरिया मा,तोर ओ बसेरा हे। तोर सुरता हा जोही, बेरा-कुबेरा हे।।2 दिन काटौं सुरता मा-2-बिरहा मा रैना। तैं तो परदेशी मैना,लेके मोर चैना कहाँ उडागे ओ मिलाके नैना..2 अंतरा-2 गुदगुदाथे सुरता मा,तोर मुस्काई हा। नैना मा झूल जाथे,तोर सुघराई हा।।2 छेदे मोर छतिया ला-2तोर मीठ बैना तैं तो परदेशी मैना,लेके मोर चैना कहाँ उडागे ओ मिलाके नैना..2 डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा छत्तीसगढ़

शैड साँग

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वियोग शृंगार गीत(53) जब जब रानी तोर,सुरता सताथे ओ बिरहा के आगी हा,जीव ला जलाथे ओ तोला देखे बिना गोरी-जीव छटपटाथे ओ। बिरहा के अआगी हा, जीव ल जलाथे ओ जब जब रानी तोर सुरता सताथे ओ।। अंतरा(१) कइसे गोरी तैं भुलाए,मया के बँधना। आहूँ केहे नइ आये, तैं मोर अँगना।। तोर आसरा हा गोरी-दिल धड़काथे ओ। दीया मया के रे जोही, बड़ फड़फड़ाते ओ बिरहा के आगी हा, जीव ला जलाथे ओ जब जब रानी तोर,सुरता सताथे ओ।। अंतरा(२) मोहनी मया खवाये,काबर मोला नशा मया के पिलाये, काबर मोला सोच के तोला बैरी -मन मुरझाथे ओ मया के मैना ह दिनभर, बड़ नरियाथे वो बिरहा के अग्नि हा,  जीव ला जलाथे ओ जब जब रानी तोर,सुरता सताथे ओ।। जब जब रानी तोर,सुरता सताथे ओ बिरहा के अग्नि हा,जीव ला जलाथे ओ डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा छत्तीसगढ़

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विरह गीत(58) *गायक* तैं काबर तैं काबर महुरा घोरे ओ... मोर मया मा दिवानी... कइसे तैं हा मिटा डरे ओ...2 मोर मया के निशानी... *अंतरा*(1) करे रहेंव मैं ये दुनिया मा,मया तोर ले जादा। दगाबाज तैं दगाबाज ओ,भुला डरे सब वादा। आधा शीशी करे गियाँ रे...2 मोर मया के कहानी... *अंतरा*(2) मजबूरी ला समझ मयारू,हे जाति के बंधन। नइ पहिरौं मैं तोर नाँव के,मोर हाथ मा कंगन।  कइसे करदौं अरपन मैं हा-2 मोर सउँहे जिनगानी.. नइ होवँव नइ होवँव टूरा रे.. तोर मया के दिवानी.. गीत- डी.पी.लहरे"मौज" कवर्धा छत्तीसगढ़

गीत

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गीत करमा कहरवा *नायक* नइ जीये सकौं ओ.. रानी तोर मया ला छोड़ के//2 *नायिका* जीव छूट जाही गा... राजा तोर मया ला छोड़ के//2 *नायक* चढ़-जीना हे संग मा मरना हे संग मा जाति के बंधन ला तोड़ के।।//2 *नायिका* जीव छूट जाही गा... राजा तोर मया ला छोड़ के// अंतरा(1) *नायक* कुरिया मा हिरदे के कुरिया मा हिरदे के,ए मोर गोरी धाँध ले। *नायिका* मया के डोरी गा मया के डोरी मा,ए मोर जोही बाँध ले। *नायक* हँसी-खुशी ले जिनगी पहाबो मया के रिश्ता ला जोड़ के। नइ जीये सकौं ओ.. रानी तोर मया ला छोड़ के//2 अंतरा(2) *नायिका* बिंदिया सजा दे बिंदिया सजा दे,चंदा सहीं मोर माथ मा। *नायक* अँगना ले जाहू्ँ कँगना पहिराके,ए गोरी ओ तोर हाथ मा। *नायिका* जीना हे संग मा मरना हे संग मा जाति के बंधन ला तोड़ के नायक+नायिका मुखड़ा गीतकार-डी.पी.लहरे"मौज' कवर्धा छत्तीसगढ़