गीत

विरह गीत(58)

*गायक*
तैं काबर तैं काबर महुरा घोरे ओ...
मोर मया मा दिवानी...
कइसे तैं हा मिटा डरे ओ...2
मोर मया के निशानी...
*अंतरा*(1)
करे रहेंव मैं ये दुनिया मा,मया तोर ले जादा।
दगाबाज तैं दगाबाज ओ,भुला डरे सब वादा।
आधा शीशी करे गियाँ रे...2
मोर मया के कहानी...

*अंतरा*(2)
मजबूरी ला समझ मयारू,हे जाति के बंधन।
नइ पहिरौं मैं तोर नाँव के,मोर हाथ मा कंगन।
 कइसे करदौं अरपन मैं हा-2
मोर सउँहे जिनगानी..
नइ होवँव नइ होवँव टूरा रे..
तोर मया के दिवानी..

गीत-
डी.पी.लहरे"मौज"
कवर्धा छत्तीसगढ़

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