शैड साँग

वियोग शृंगार गीत(53)

जब जब रानी तोर,सुरता सताथे ओ
बिरहा के आगी हा,जीव ला जलाथे ओ

तोला देखे बिना गोरी-जीव छटपटाथे ओ।
बिरहा के अआगी हा, जीव ल जलाथे ओ

जब जब रानी तोर सुरता सताथे ओ।।

अंतरा(१)
कइसे गोरी तैं भुलाए,मया के बँधना।
आहूँ केहे नइ आये, तैं मोर अँगना।।
तोर आसरा हा गोरी-दिल धड़काथे ओ।
दीया मया के रे जोही, बड़ फड़फड़ाते ओ
बिरहा के आगी हा, जीव ला जलाथे ओ
जब जब रानी तोर,सुरता सताथे ओ।।

अंतरा(२)
मोहनी मया खवाये,काबर मोला
नशा मया के पिलाये, काबर मोला
सोच के तोला बैरी -मन मुरझाथे ओ
मया के मैना ह दिनभर, बड़ नरियाथे वो
बिरहा के अग्नि हा,  जीव ला जलाथे ओ
जब जब रानी तोर,सुरता सताथे ओ।।

जब जब रानी तोर,सुरता सताथे ओ
बिरहा के अग्नि हा,जीव ला जलाथे ओ

डी.पी.लहरे"मौज"
कवर्धा छत्तीसगढ़

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