सार छंद गीत (होली)... रंग मया के बरसावव जी,बोलव गुरतुर बोली। बैर भाव ला सबो भुलाके,बने मनावव होली।। दया मया हा बने रहय जी,राखव बड़ चिनहारी। मिलके गावव फाग मया के,रंग भरव पिचकारी।। रंग सबो बर लाल गुलाबी,धरके घर घर जावव। बैरी मन बन जावव हितवा,दया मया बगरावव।। उड़य गुलाली गाँव गली मा,कर लव हँसी ठिठोली..... बैर भाव ला सबो भुलाके,बने मनालव होली.....ll1 धूम मचावव नंगाड़ा के,सबझन नाचव गावव। मिलके छोटे बड़े सबो झन,फगुवा गीत सुनावव।। चिक्कन चाँदन झन राहँय जी,रंगव झारा झारा। तिलक लगाये सब ला संगी,जावव आरा पारा।। जुर मिल के सब संगे खेलव,अपनबनावव टोली.... भैर भाव ला सबो भुलाके,बने मनालव होली.....ll2 एक बझर मा आय हवय जी,रंग मया के डारव। आपस मा सब भाई भाई,राग द्वेष ला टारव।। दया मया ला बाटे बर जी ,देखव होली आये। गला मिलव आपस मा संगी,खुशी आज हे छाये।। बाँट मया ला सबला भइया,भर भर के गा झोली.... बैर भाव ला सबो भुलाके,बने मनालव होली.....ll3 गीत डी.पी.लहरे बा...