सार छन्द गीत श्रृंगार अलबेली

सार छन्द गीत श्रृंगार
(अलबेली)

मुटुर मुटुर बड़ देखे गोरी,कुलके बड़ अलबेली।
चिक्कन चिक्कन गाल हवय ओ,आँखी हे कजरेली।।

होठ तोर ओ लाली लाली,मुचमुच ले मुस्काये।
बोले गुरतुर गुरतुर बोली,बतरस ला बरसाये।।

फभे कान मा ढ़ार सोनहा,देखँय सबो सहेली.....
चिक्कन चिक्कन गाल हवय ओ,आँखी हे कजरेली.....

कारी चूँदी लहराये ओ,दाँत बरय जस हीरा।
देखे भर मा तोला गोरी,मोर मिटय सब पीरा।।

हरियर लुगरा लाल पोलखा,अंग अंग ला साजे।
तोर पाँव के पैरी गोरी,छुनुर छुनुर बड़ बाजे।।

गर मा पहिरे हार सोन के,देखाये बरपेली.....
चिक्कन चिक्कन गाल हवय ओ,आँखी हे कजरेली.....

कंचन जइसन चमकत हावय,तोर गजब के काया।
चंदा घलो लजावत हावय,तोर देख के माया।।

कोन बिधाता गढ़े हवय ओ,कंचन काया पाये।
लगय चेहरा गोंदा फुलवा,मन बैरी ललचाये।।

तन अब्बड़ ममहावे गोरी,लागे फूल चमेली....
चिक्कन चिक्कन गाल हवय ओ आँखी हे कजरेली....

गीत
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 04-02-19
सर्वाधिकार सुरक्षित है BY dplahre87@gmail.com

Comments

Popular posts from this blog

लक्ष्मण मस्तुरिहा

छत्तीसगढ़ महतारी

मरिया भात..