लावनी छंद गीत दीवाना
(श्रृंगार गीत) दीवाना
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा।
का जादू का मंतर मारे,गुरतुर बोली बैना मा।।
आठो पहरी सुरता आथे,सुधबुध ला भूला डारे।
बन भौंरा कस माते रहिथौं,मया पिरित लहरा मारे।।
मोर हृदय मा बसके गोरी,दिखथस मन के ऐना मा...
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा...1ll
मन बगिया के भौंरा मैं हा,चंपा तिहीं चमेली ओ।
कुहु कुहु कुहके मन बगिया मा,कोयल सही नवेली ओ।।
साँवरिया तैं अपन बनाले,गुनते रहिथँव रैना मा...
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा....2ll
चंदा जइसे तोर रूप हे,मन मोरे मोहागे ओ।
अबड़ मया मैं करथौं गोरी,मोर हृदय मा छागे ओ।
कोन जनी का जादू डारे,ये पिंजरा के मैना मा
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा....3ll
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 22-02-19
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