का लिखौं

श्रृंगार नजर आथे

का लिखौं सब मा श्रृंगार नजर आथे।
जीव जगत सब मा प्यार नजर आथे।।

सोये जागे बिहनिया रतिहा चारो कोती,
जग मा मोला भइया बहार नजर आथे।।

सगरी सुख मिले हे मोला जिनगी मा।
छिन छिन मा खुशी हजार नजर आथे।।

रोज मनावँव ईद क्रिसमस होरी देवारी,
अब हर दिन मोला तिहार नजर आथे।।

नानचून भले हावय जिनगी संगवारी,
ये जिनगी मोला संसार नजर आथे।।

दया मया के होथे जी अमरित बरसा,
मोर देश मा मया भरमार नजर आथे।।

चंदा सुरुज पानी हवा बादर बिजली,
सब मा प्रकृति के उपहार नजर आथे।।

धूर्रा माटी चंदन बंदन तरिया नदिया,
प्रकृति के सब चीज सार नजर आथे।।

डी.पी.के अंतस मा झनकार नजर आथे।
का लिखौं सब मा श्रृंगार नजर आथे।।

डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 07-02-19

Comments

Popular posts from this blog

लक्ष्मण मस्तुरिहा

छत्तीसगढ़ महतारी

मरिया भात..