दर्दिला गीत..

विरह गीत
मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2
पखरा समझ के ए हिरदे ला-काबर टोरे-फोरे..2

अंतरा-1
धधकत हावय ए छाती हा,बरसे आगी गोला।
तोर बिरह मा दगाबाज ओ,लेशावत हे चोला।
ए जिनगी ला दुख दहरा मा-काबर तँय हा बोरे
मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2

अंतरा-2
आस रहिस ओ तोर हाथ मा,पहिराये के कँगना।
जीवन साथी अपन बनाके,लाये के घर अँगना।।
मया बढ़ाके छोड़े मोला-दूसर ले नाता जोरे..
मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2

अंतरा-3
मोर दरद ला कौन समझही,तरतर रोवय नैना।
तोर बिना मँय कइसे जीहूँ,लूटे तँय सुख चैना।।
बने बँधाये मया के बँधना-काबर छिन मा छोरे...
मोर यार दिवाणी रे,मोर मया मा जाहर घोरे..2

डी.पी.लहरे"मौज" कापी राईट
कवि,गीतकार,ग़ज़लकार, छन्दकार
व्याख्याता शा.उ.मा.वि.इंदौरी
कवर्धा छत्तीसगढ़

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