लक्ष्मण मस्तुरिहा

हमेशा जवां - खुमान संगीत : कुछ गीतों की सूची

(अधिकांश गीतों के गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिया) 

न भूतो न भविष्यति.......

अमर गीत की पहचान यही है कि कहीं मुखड़ा पढ़ो तो वह गीत हृदय में सुनाई देने लगता है। आइये हृदय के रिकार्ड प्लेयर पर उनके गीत सुनें -

मोर संग चलव रे........
मँय बंदत हँव दिन रात मोर धरती मैया जय होवै तोर.....
मँय छत्तीसगढ़िया हँव गा.......
वा रे मोर पँड़की मैना, तोर कजरेरी नैना.......
मन डोले रे "माघ फगुनवा" ........
पता ले जा रे, पता दे जा रे, गाड़ीवाला.......
चौरा मा गोंदा रसिया मोर बारी मा पताल......
धनी बिन जग लागे सुन्ना रे........
मोला जावन दे न रे अलबेला मोर........
कोन सुर बाजँव मँय तो घुनही बंसुरिया.........
बखरी के तूमा नार बरोबर मन झूमे........
तोर खोपा मा फुँदरा रइहौं बन के.........
छन्नर छन्नर पैरी बाजे, खन्नर खन्नर चूरी........
हम तोरे संगवारी कबीरा हो.............
तोर बाली हे उमरिया.............
नाच नचनी रे झूम झूम के झमाझम..........
कइसे दीखथे आज उदास कजरेरी मोर मैना.....
प्राण तर जाई रामा, चोला तर जाई.........
लहर मारे लहर बुंदिया..........
परगे किनारी मा चिन्हारी ये लुगरा तोर मन के नोहय.....
संगी के मया जुलुम होगे रे...........
सावन आगे आबे आबे आबे संगी मोर.........
चिटिक अंजोरी निर्मल छइयां गली गली बगराये ओ पुन्नी के चंदा मोर गाँव मा.........
चलो मन बँसरी बजाए जिहाँ मोहना रे........
मंगनी मा मांगे मया नइ मिले ........
कहाँ रे हरदी तोर जनावन .......
दड़बड़ दड़बड़ आइन बरतिया .......
मोर राजा दुलरुवा बेटा, तँय नागरिहा बन जाबे......
अहो मन भजो गणपति गणराज ......
जय हो जय सरसती माई........
जय हो बमलेसरी मैया........
हमका घेरी बेरी घूर घूर निहारे ओ बलमा पान ठेला वाला.........
झन आंजबे टूरी आँखी मा काजर बिन बरसे रेंग देही करिया बादर छूट जाही ओ परान......
मोर खेती खार रुमझुम ..........
नाक बर नथनी अउ पैरी मोरे पाँव बर.........
अब मोला जान दे संगवारी.............
चंदा के टिकुली चंदैनी के फूल............
मोला मैके देखे के साध धनी मोर बर लुगरा ले दे हो.......
आज दौरी मा बइला मन घूमथें .......
देखो फुलगे चंदैनी गोंदा फूलगे .......
धरती के अँगना मा चंदैनी गोंदा फुलगे.......
सावन आगे आगे आगे आबे संगी मोर......
चल सहर जातेन रे भाई, गाँव ला छोड़ के शहर जातेन .....
अंगरेजिया बोली मा बोले धनी परदेसिया होगे ना..
आगे सुराज के दिन रे संगी, बाँध ले पागा साज ले बण्डी करमा गीत गा के आजा रे झूम जा संगी मोर......
चन्दा बनके जीबो हम, सुरुज बनके बरबो हम......
छोड़ के गँवई शहर डहर झन जा झन जा संगा रे.......
ओ काँटा खूँटी के बोवैया, बने बने के नठइया,
 दया मया ले जा रे मोर गाँव ले.......
तोला देखे रहेंव रे, तोला देखे रहेंव गा, धमनी के हाट मा बोइर तरी .............
काल के अवइया कइसे आज ले नइ आये........
काबर समाए रे मोर बैरी नैना मा..........
मोर कुरिया सुन्ना रे मितवा तोरे बिना.........
तोर मया मोर बर जहर जुल्मी होगे लहरी यार .......
तोर धरती तोर माटी रे भैया .......
चल जोही जुरमिल कमाबो........
चलो जिनगी ला जगाबो...........
आँखी मा गड़ी जाय............
अन्ताज पाय रहेंव आँखी मिलाय रहेंव मया बान धरे रहेंव तबभे चिरई उड़ गे..........
चल चल गा किसान "बोए चली धान" असाढ़ आगे गा
चलो जाबो रे भाई, जुरमिल के सबो झन करबो "निंदाई"
भैया गा किसान हो जा तैयार, मुड़ मा पागा कान मा चोंगी धर ले हँसिया अउ डोरी ना, चल चल गा भैया "लुए चली धान" .....
आज दउँरी मा बइला मन घूमत हे.......
आगी अंगरा बरोबर घाम बरसत हे .......
"सावन" बदरिया घिर आगे.......
घानी मुनी घोर दे पानी दमोर दे ......
सुन संगवारी मोर मितान .......
झिलमिल दिया बुता देबे ........
द्वार बनाओ बधाई निछावर बाँटन निछावर बाँटन हो
ललना लुटावहु रतन भंडार चंदैनी गोंदा अवतरे हो.....
लागे झन कखरो नजर रे दुलरू बेटा.......
सुत जा ओ बेटी मोर, झन रो दुलौरिन मोर........ 
तोर धरती तोर माटी..
मोर भारत भुइयाँ धरमधाम हे.....
हम करतब कारण मर जाबो रे, फेर के लेबो संग्राम....
चम चम चमके मा बने नही अब कड़क के बरसे बर परिही .......
माटी होही तोर चोला रे संगी .......
दिया के बाती ह कहिथे ........
हर चांदी हर चांदी डोकरा रोवय मनावै डोकरी का या.....
तोर संग राम राम के बेरा, भेंट होगे संगवारी, मुस्का के जोहार ले ले.......
बोकबाय देखे,हाले न डोले कुछु नइ बोलय टूरा अनचिन्हार ........
मोर अँगना मा कोन ठाढ़े हे........
मजा हे मजा आजा मोर मोहना.......
रूप धरे मोहनी मोहथे संसार........
बात मान ले परदेस झन जा रे .......
लक्ष्मण मस्तुरिया की कृति ....मँय छत्तीसगढ़ के माटी अँव (40 पद, 60 मिनट का सम्पूर्ण कैसेट)

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