छन्द गीत भाग 2
छन्द गीत भाग -2 सार छन्द गीत(१) का बरनँव महतारी महिमा,शब्द कहाँ ले पावँव। एको अक्षर ला नइ जानँव,कइसे कलम चलावँव।। महतारी कस इहाँ बिधाता,नइ हे कोनों दूजा। मोर बिधाता महतारी हे,करौं रातदिन पूजा। करौं वंदना चरण कमल के,काया फूल चघावँव।। का बरनँव महतारी महिमा,शब्द कहाँ ले पावँव।। महतारी के पबरित कोरा,सरग बरोबर लागय। अँचरा के सुख छँइहाँ ले सब,दुख बाधा हर भागय।। कभू चुका नइ पावँव करजा,बस मँय गुन ला गावँव। का बरनँव महतारी महिमा,शब्द कहाँ ले पावँव।। महतारी ममता ले होवय,जिनगी हा उजियारी। बड़ महकावय घर अँगना ला,बनके खुद फुलवारी।। अमरित जइसे गोरस पी के,भाग अपन चमकावँव।। का बरनँव महतारी महिमा,शब्द कहाँ ले पावँव।। बरवै छन्द गीत(२) सबले सुग्घर हावय,हमरो गाँव। बर पीपर के पबरित,जुड़हा छाँव।। नदिया नरवा बोहत,रहिथे धार। हरियर हरियर दिखथे,खेती खार।। जुरमिल जम्मो करथें,खेती काम।। महिनत के बदला मा,पाथें दाम। चिरई चहके कउँवा,करथे काँव। सबले सुग्घर हावय,हमरो गाँव।।(१) करथें सबो किसानी,पाथें धान। मारय नइ जी कोनो,शेखी शान।। संझा बेरा मनखे,सब सकलाँय। गुरतुर गुरतुर बोली,मा बतियाँय।। बिह...