मरिया भात..
मरिया भात...
मरे ऊपर ले खाथव काबर मरिया भात।
जियत म तो भावव नहीं मारेव काबर लात।।
दुख पीरा ला देखव नहीं वाह रे मानुष जात।
मरे ऊपर ले खाथव काबर मरिया भात।।
दुखिया रोवथ रहिथे दुख म दिन अउ रात।
मरे ऊपर ले खाथव काबर मरिया भात।।
सुख के संगी सब हे दुख म देवव न साथ।
मरे ऊपर ले खाथव काबर मरिया भात।।
छोड़ दव ये रिवाज ल मान लव मोर बात।
मरे ऊपर ले खाथव काबर मरिया भात।।
लिखईया-डी पी लहरे
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Dplahre86@gmail.com
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