छन्द गीत बहार

छन्द गीत बहार

गुरू दोहा छन्द गीत(१)
गुरू सहीं जी कोन हे,ये जग मा भगवान।
मन अँधियारी टारके,देथे सब ला ज्ञान।।

गुरू नाँव ले भागथे,मन के सबो विकार।
शिक्षा-दीक्षा ले बने,देथे नवा विचार।।
महिमा अगम अपार हे,गुरू ज्ञान के खान।
गुरू सहीं जी कोन हे,ये जग मा भगवान।।

गुरू सिखाये सीख लव,होही बेड़ा पार।
बिना गुरू के जान लव,चलय नहीं संसार।।
गुरू बचन अनमोल हे,राखव गा सम्मान।
गुरू सहीं जी कोन हे,ये जग मा भगवान।।

सार छन्द गीत(२)
पाँव परत हँव दाई मँय हा,निसदिन गुन ला गावँव।
सात जनम बर बेटा बनके,तोर कोख ले आवँव ।।

दया मया ममता सागर हे,महतारी के कोरा।
कृपा मोर बर करके दाई,करथस जोंखा तोरा।।
महिमा अब्बड़ भारी हावय,काया फूल चढ़ावँव।
पाँव परत हँव दाई मँय हा,निसदिन गुन ला गावँव।।

सरग बरोबर तोर हाँथ हे,मोला ओ सिरजाये।
अँगरी धरके तँय हा दाई,ठुमुक ठुमक रेंगाये।।
मोर विधाता तँय हा दाई,सुख छँइहाँ ला पावँव।
पाँव परत हँव दाई मँय हा,निसदिन गुन ला गावँव।।

तहीं मोर ओ चाँदी सोना,धन दौलत अउ हीरा।
मोरे कारन तोला दाई,सहे परय झन पीरा।।
बेटा फर्ज निभाके दाई,सेवा तोर बजावँव।
पाँव परत हँव दाई मँय हा,निसदिन गुन ला गावँव

आल्हा छन्द गीत(३)
भारत माँ के बेटा हावँव,वंदत हँव दूनो कर जोर।
माथ नवावँव ए माटी मा,चंदन हे भुँइयाँ हा मोर।।

वीर सिपाही मँय बलिदानी,खड़े हवँव मँय छाती तान।
बइरी मन ला मार भगाहूँ,ले लेहूँ बइरी के जान।।
भारत माँ ला सरग बनाहूँ,दया मया के बोहय धार।
भाई चारा इहाँ लाय बर,सबके करहूँ मँय उपकार।।
ए भुँइयाँ ला पबरित करके,लाहूँ घर-घर सुख के भोर।
भारत माँ के बेटा हावँव,वंदत हँव दूनो कर जोर।।

मान बढ़ाहूँ भारत माँ के,ये भुइयाँ के मँय रखवार।।
आँखी कोनों देखाही ता,धरे हवँव कतको हथियार।।
बइरी बर लाठी बन जाहूँ,हितवा मन बर बनँव मितान। 
दुख पीरा मा संग निभावँव,भारत माँ के गावँव गान।।
सच्चा बेटा मँय हा बनके,भारत माँ के करहूँ शोर।
भारत माँ के बेटा हावँव,वंदत हँव दूनो कर जोर।।

सार छंद गीत(४)
हमर देश के शान तिरंगा,झंड़ा ला फहराबो।
चलव चलव जुरमिल के संगी,एखर मान बढ़ाबो।

हमर देश के संविधान हा,हावय सबले पावन।
किसम किसम अधिकार इहाँ हे,तेला सब अपनावन।।
रहय एकता हमर बीच मा,भाई चारा लाबो।
हमर देश के शान तिरंगा,झंडा ला फहराबो।।

जान गँवाइन भारत माँ बर,कतको वीरसिपाही।
आजादी तब पाये हावन,हे संसार गवाही।।
अमर वीर बलिदानी मनके,गाथा ला हम गाबो।
हमर देश के शान तिरंगा,झंडा ला फहराबो।।

उल्लाला छंद गीत गाँव रे-(५)

सबले सुग्घर गाँव रे,बर पीपर के छाँव रे।
हरियर-हरियर पेड़ हे,धनहा डोली मेड़ हे।।

घर-घर सबो किसान हे,कोठी ढ़ोली धान हे।
महिनत करथें तान के,रोटी खाँय ईमान के।।2
फुरहुर पुरवाही बहे,तरिया नदिया ठाँव रे...
सबले सुग्घर गाँव रे,बर पीपर के छाँव रे...ll1

सुमता ले सब साथ मा,अन उपजाथें हाथ मा।
मँदरस जइसे गोठ जी,बोली भाखा पोठ जी।।2
सरग बरोबर गाँव ला,कहाँ छोड़ मँय जाँव रे...
सबले सुग्घर गाँव रे,बर पीपर के छाँव रे..ll2

सुन लौ मोर मितान जी,कतका करौं बखान जी।
मन मा धर लौ ध्यान गा,सुख के गाँव खदान गा।
वंदन हावय गाँव ला,जनम-जनम बर पाँव रे...
सबले सुग्घर गाँव रे,बर पीपर के छाँव रे....ll3

दोहा छन्द गीत-(६)
सबले सुग्घर देश हे,भारत जेखर नाँव।
मंदिर मस्जिद चर्च हे,गुरुद्वारा के छाँव।।

सब मनखे मा एकता,इही आय पहिचान।
सुमता समता ले बने,भारत देश महान।।
लोहा,ताम्बा,कोइला,सबके इहाँ खदान।
अन उपजाथें खेत मा,सोना सहीं किसान।
हरियर खेती खार ले,ममहावय जी गाँव...
सबले सुग्घर देश हे,भारत जेखर नाँव...

भले अलग हर राज हे,सबो हवँय जी एक।
अलग-अलग भाषा इहाँ,बोली घलो अनेक।।
नदिया सागर बाँध मा,आगर छलकय धार।
बिजली पानी ले इहाँ,खेती होथे सार।।
सरग बरोबर लागथे,येही सुख के ठाँव...
सबले सुग्घर देश हे,भारत जेखर नाँव...

सार छन्द गीत(७)

भाव भजन कर ले रे संगी,के दिन के जिनगानी।
लहुटे हंसा आय नहीं जी,लहुटे कहाँ जवानी।।

ये तन कच्चा माटी संगी,जादा झन इतराना।
दया मया ले जी ले जिनगी,सब ला हावय जाना।
के दिन बर पाये तँय चोला,झन कर जी अभिमानी।
भाव भजन कर ले रे संगी,के दिन के जिनगानी।

पर सेवा उपकार इहाँ कर,काम तोर ये आही।
भटकत काया ला रे संगी,येही पार लगाही।।3
काल हवय ए सार जगत मा,जिनगी होही पानी।
भाव भजन कर ले रे संगी,के दिन के जिनगानी।

लगा मया के बिरवा संगी,सुख के छँइहाँ पाबे।
दया-मया अंतस मा भरले,नइ तो बड़ पछताबे।
झन दे कोनो ला तँय पीरा,दे ले मया निशानी....
भाव भजन कर ले रे संगी,कै दिन के जिनगानी.

सार छंद गीत(८)
सोंचे हाँवव पढ़ा लिखा के,अफसर बड़े बनाहूँ।
मोर दुलौरिन बेटी तोला,कइसे बिदा कराहूँ।।

तोर रहे मा होवत हावय,घर अँगना उजियारी।
दसो दिशा ममहाये जइसे,तहीं मोर फुलवारी।।
मँय तो हावँव किस्मत वाले,बेटी फर्ज निभाहूँ।
मोर दुलौरिन बेटी तोला,कइसे बिदा कराहूँ।।

दाई-बाबू के मान बढ़ाबे।बनके राजदुलारी।
सुख-दुख मा तँय संग निभाबे,रखबे मया चिन्हारी।।
तोर खुशी पाये बर बेटी,सब कुछ मँय कर जाहूँ।
मोर दुलौरिन बेटी तोला,कइसे बिदा कराहूँ।।

मोर मयारू हीरा बेटी,पढ़-लिख नाँव कमाबे।
ज्ञान-वान तँय बनके अब्बड़,जिनगी बने चलाबे।।
साँसा के राहत ले बेटी,तोला बने पढ़ाहूँ।
मोर दुलौरिन बेटी तोला,कइसे बिदा कराहूँ।।

सार छंद गीत*(९)

दया-मया हे सार जगत मा,राखव मया चिन्हारी।
दया-मया बिन नइ तो होवय,जिनगी मा उजियारी।।

गुत्तुर बोलव सबले भइया,गढ़लव नवा कहानी।
ये जिनगी के काय ठिकाना,दू दिन के महमानी।।
बैर-भाव ला छोड़व संगी,छोड़व झूठ-लबारी।
दया-मया हे सार जगत मा,राखव मया चिन्हारी।।

काय इहाँ रहि पाही जानव,चारे दिन के काया।
छोड़ जगत ला जाना हावय,छूट जही सब माया।।
नाँव अमर हो जाही संगी,बनव सबो हितकारी।
दया-मया हे सार जगत मा,राखव मया चिन्हारी।।

ताटंक छंद गीत(१०)

छोड़व जम्मो चीज बिदेशी,देशी ला अपनाना हे।।
देश हीत के काम करे बर,मिलके फर्ज निभाना हे।

सोन चिरइँया भारत भुँइयाँ,दुनिया मा कहिलाथे गा।
सबो चीज उत्पादन करके,जन जीवन हरसाथे गा।।
फुलवा जइसे चारो कोती,भारत ला महकाना हे।
छोड़व जम्मो चीज बिदेशी,देशी ला अपनाना हे।

सबो चीज भारत के बउरव,राहय देश कमाई मा।
चलव लुटादव तन-मन भइया,मिलके देश भलाई मा।।
परबुधिया झिन बनहू कोनों,सब ला ये समझाना हे।।
छोड़व जम्मो चीज बिदेशी,देशी ला अपनाना हे।

इहाँ चीज हे चोक्खा-चोक्खा,सब हे बड़ उपयोगी जी।
अपन देश के गुन ला गावत,बन जावव उपभोगी जी।।
भारत राहय सब ले आगू,दुनिया ला दिखलाना हे।
छोड़व जम्मो चीज बिदेशी,देशी अपनाना हे।

सार छंद गीत(११)

ममता करुणा के तँय मूरत,मोर मिनी माता ओ।
अघुवा बनके जोरे राहस,जन-जन ले नाता ओ।।

सतनामी के शान तहीं हस,सबके के राज दुलारी।
सुमता समता लाके तँय हा,टारे जग अँधियारी।।
दुखिया मन के दु:ख हरइया,सुख के तँय दाता ओ।
ममता करुणा के तँय मूरत,मोर मिनी माता ओ।।
नारी मन के मान बढ़ाये,पहली संसद बनके।
सत्य राह मा निसदिन तँय हा,चले रहे ओ तनके।।
दीन हीन सब मनखे मनके,तँय भाग बिधाता ओ।
ममता करुणा के तँय मूरत,मोर मिनी माता ओ।।

तोर सहीं महिमा वाले अब,नइ हें कोनो दूजा।
जब तक चाँद सुरुज हा रइही,जुग-जुग होही पूजा।।
भाई-चारा अमर एकता,सब मा उद्गाता ओ।।
ममता करुणा के तँय मूरत,मोर मिनी माता ओ।।

आल्हा गीत(१२)

काबर करथौ रे पापी हो,बेटी ऊपर अत्याचार।
दया-धरम मन मा नइ राखौ,बन जाथौ कइसे गद्दार।।

सबके बहिनी बेटी एक्के,होथे जिनगी के आधार।
छोड़व शैतानी रक्सा हो,दे बर सीखौ मया दुलार।।
अंतस के पीरा हा बढ़थे,कलपत रहिथे घर-परिवार।
काबर करथौ रे पापी हो,नारी ऊपर अत्याचार।।

मान करौ नारी के कहिथो,कहिथौ लक्ष्मी के अवतार।
अनाचार तुम करके काबर,कर देथौ तुरते संहार।।
मानवता ला कुचर कुचर के,दरिंदगी के सीमा पार।
काबर करथौ रे पापी हो,नारी ऊपर अत्याचार।।

कोन सजा देही दोषी ला,न्याय दिला करही उद्धार
न्याय करे बर भूल चुके हे,कोंदा बन बइठे सरकार।।
दुख पीरा ला कौन हरे अब,जग बैरी होथे अँधियार
काबर करथौ रे पापी हो,नारी ऊपर अत्याचार।।

सरसी छंद गीत(१३)
ठाँव ठाँव रावन दुस्शासन,खींचत लुगरा कोर।
कइसे लाज बँचावँव बेटी,आँसू बरसे मोर।।

बनके रावन जइसे करथें अब,निसदिन अत्याचार।
दया-धरम मन मा नइ राखैं,बनगे हें गद्दार।।
सबके बहिनी बेटी ऊपर,दुख छाये घनघोर।
ठाँव ठाँव रावन दुस्शासन,खींचत लुगरा कोर।।

मान करौ नारी के कहिके,कर देथें संघार।
बेटी ला काबर नइ समझैं,लक्ष्मी के अवतार।।
मानवता ला कुचर डरें हें,बनके डाँकू चोर।
ठाँव ठाँव रावन दुस्शासन,खींचत लुगरा कोर।।

कोन सजा देही दोषी ला,सबके इही पुकार।
दुख पीरा ला कोन हरै अब,जग होगे अँधियार।।
कोन जनी अब कइसे होही,घर घर नवा अँजोर
ठाँव ठाँव रावन दुस्शासन,खींचत लुगरा कोर।।

ताटंक+सरसी छंद गीत(१४)
बेटा बन जा सरवन जइसे,जग मा नाँव कमाले रे।
दाई बाबू के सेवा कर,सउँहे भाग जगाले रे।।

नान्हे पन ले पाले पोंंसे,दया मया बरसाके जी।
लइकन मन बर खुशी लुटावँय,दुख पीरा बिसराके जी।।
दाई बाबू बर हँस हँस के,अब्बड़ खुशी लुटाले रे।
बेटा बन जा सरवन जइसे,जग मा नाँव कमाले रे।

समझ इहाँ दाई बाबू मन,परगट हें भगवान।
इँखरे पूजा करके संगी,दे निसदिन सम्मान।।
दाई बाबू के मन हरसाकेनाता बने निभाले रे।
बेटा बन जा सरवन जइसे,जग मा नाँव कमाले रे।

बरवै छंद गीत(१५)

मोर दुलौरिन जाही,अब ससुरार।
सुन्ना करके अँगना,घर परिवार।।

ए अँगना मा आगे,हवय बरात।
दुलरू के सँग परही,भाँवर सात।।
पढ़ लिख बेटी होगे,हे हुशियार।
मोर दुलौरिन जाही,अब ससुरार।।

कुलकत हावय नोनी,देखव आज।
अपन धनी घर बेटी,करही राज।।
ससुर सास ले पाही,मया दुलार
मोर दुलौरिन जाही,अब ससुरार।।

बिदा करे के बेरा,निकले जान।
बेटी बनगे दू दिन,के महमान।
बेटी पाही सुख के,घर संसार।
मोर दुलौरिन जाही,अब ससुरार।।

दया मया के होही,अब बरसात।
हँसी खुशी मा कटही,ए दिन रात।।
जिनगी के नँइयाँ हा,लगही पार।
मोर दुलौरिन जाही,अब ससुरार।।

सार छंद गीत (१६)

मोर दुलरवा राजा बेटा,ए आँखी के तारा।
सुरुज नरायन जइसे बरके,करबे जग उजियारा।।

गूँजत राहय चारो कोती,मन भावन किलकारी।
महकाये बर आये तँय हा,घर अँगना फुलवारी।।
बेटा सरवन के जइसे तँय-बनबे मोर सहारा।
मोर दुलरवा राजा बेटा,ए आँखी के तारा।।

हँसी खुशी मा जिनगी चलही ,पढ़ लिख भाग जगाबे।
सुख के छइँहा पाबे निसदिन,जग मा नाँव कमाबे।।
भारत माँ के सेवा करबे,लाबे भाई चारा।
मोर दुलरवा राजा बेटा,ए आँखी के तारा।।

बसंत रितु सरसी छंद(१७)

रितु बसंत दे बर आये हे,जन जन ला उपहार।
हँसी खुशी मा दिन कटही अब,सुख पाही संसार।।

मन भावन मौसम लाये हे,रितु बसंत हा आज।
धरती लागय दुलहिन जइसे,बिकट करे हे साज।।
रंग बिरंगा फूल फुले हे,महकय खेती खार।
रितु बसंत दे बर आये हे,जन जन ला उपहार।।

देख कोइली कुहक कुहक के,गावय सुघ्घर गीत।
मन हर्षावय गुत्तुर बोली,मन ला लेवय जीत।।
पिंवरा पिंवरा आमा मउरे,लहकय झूमय डार।
रितु बसंत दे बर आये हे,जन जन ला उपहार।।

रितु बसंत राजा हा भरथे,तन मन मा उल्लास।
सदा बनाथे जीव जंतु बर,दिन बादर ला खास।।
फागुन हा आये बर अब तो,खड़े हवय तइयार।
रितु बसंत दे बर आये हे,जन जन ला उपहार।।

सार छंद गीत(१८)
ऋतु बसंती के आये ला,बउरागे अमराई।
मौसम हा मन भावन होगे,जन-जन बर सुखदाई।।

परसा फुलवा लाली लाली,सरसो फुलवा पिंवरा।
ममहावत हे चारो कोती,भावत हावय जिंवरा।।
रंग बिरंगा फुलवा मन के,नीक लगे मुस्काई।।
ऋतु बसंती के आये ला,बउरागे अमराई।।

कुहके कारी कोयलिया हा,मारत हावय ताना।
फूल फूल मा झूमे नाचे,भौंरा गावय गाना।।
तन मन ला हरसावय अब्बड़,फुरहुर ए पुरवाई।
ऋतु बसंती के आये ला,बउरागे अमराई।।

फागुन के आये के अब तो,होगे हे तइयारी।
गाँव गली मा ढ़ोल नँगारा,चलही जी पिचकारी।।
रंग लगाही हँसी खुशी ले,होही बड़ पहुनाई।।
ऋतु बंसती के आये ला,बउरागे अमराई।।

ताटंक छंद गीत(१९)

ऋतु बसंत के दिन आये हे,ख़ुशी सबो बर लाये हे।
परसा फुलवा लाली लाली,अमुवा हा मउराये हे।

आज कोइली कुहकत हावय,गावय गुत्तुर गाना जी।
रंग बिरंगी फूल फुले हे,उलहा डारा-पाना जी।।
फूल फूल मा जाके अब तो,भौंरा हा मँडराये हे।
ऋतु बसंत के दिन आये हे,ख़ुशी सबो बर लाये हे।

आनी-बानी साज करे हे,ये धरती महतारी हा।
गमकत हावय चारो कोती,बगिया अउ फुलवारी हा।
फागुन महिना आही कहिके,रंग बसंती छाये हे..
ऋतु बसंत के दिन आये हे,ख़ुशी सबो बर लाये..ll

गरमी जाड़ा कुछ नइ लागे,मौसम मस्त सुहाना हे।
मया-मयारू मिलना होही,उँखरे आज जमाना हे।।
फुरहुर-फुरहुर पुरवाही जी,सबके मन ला भाये हे।
ऋतु बसंत के दिन आये हे,ख़ुशी सबो बर लाये हे..ll

सार छंद गीत मौसम-(२०)

बिन मौसम के बरसै पानी,करय अपन मनमानी
बिजली चमकै बादर गरजै,बरसै बरखा रानी..

सनन-सनन बड़ गर्रा धूँका,जाड़ा लागय भारी।
चिखला माते गली खोर मा,डर लागै अँधियारी।।
काम बिगाड़े ये मौसम हा,हलाकान जिनगानी...
बिन मौसम के बरसै पानी,करय अपन मनमानी

अलकरहा हे ये मौसम हा,चिटको जी नइ भावै।
सबो फसल ला चौपट करदिस,ये हा कब ले जावै।।
ठुठरत हावँय चारो कोती,जम्मो जीव परानी...
बिन मौसम के बरसै पानी,करय अपन मनमानी

सावन महिना जइसे लागे,ये मौसम के सेती।
तबियत सबके बिगड़े संगी,बिगड़त हावय खेती।।
कभू सुहावै अब नइ मोला,बादर के शैतानी...
बिन मौसम के बरसै पानी,करय अपन मनमानी

सार छंद गीत (२१)

उजरत कखरो घर ला संगी,मिलके चलव बसाबो।
दया मया के रस धारा मा,नइयाँ पार लगाबो।।

झन रोवँय पीरा मा कोनो,पीरा सबो मिटाबो।
उजरत कखरो घर ला संगी,मिलके चलव बसाबो

मिटय सबो के पीरा संगी,सबला बने हँसाबो।
दीन दुखी सब मनके मन के,हम लाठी बन जाबो।।
भेद भाव ला हमन भुला के,आगू हाथ बढ़ाबो।
उजरत कखरो घर ला संगी,मिलके चलव बसाबो

सत के रस्ता चलँय सबो झन,सत रस्ता देखाबो।
रहय अँजोरी सबके जिनगी,उजियारा जी लाबो।।
दया मया के दीया संगी,मिलके आज जलाबो।
उजरत कखरो घर ला भाई,मिलके चलव बसाबो

मया बाँधबो सब मनखे बर,छाती अपन लगाबो।
बने रहय जी भाई चारा,जिनगी सुघर पहाबो।
सुमता के रस्ता मा चलके,दुनिया ला देखाबो।
उजरत कखरो घर ला संगी,मिलके चलव बसाबो।

ताटंक छंद गीत(२२)

मोर मयारू मैना आ रे,हिरदे के फुलवारी मा..
बाँह पसारे रद्दा जोहत,खड़े हवँव तइयारी माll

आँखी-आँखी झूलत हावै,तोर रूप हा रानी ओ।
तोर मया मा अरझे हावै,अब तो ये जिनगानी ओ।।
तोर मया बिन जीयत हावँव,जिनगी यार उधारी मा।
मोर मयारू मैना आबे,हिरदे के फुलवारी मा।।

माला जपथौं तोर नाँव के,पाहूँ कहिके तोला ओ ।
तोर दरश अब होय बरस हे,कलपत हावै चोला ओ।।
तोर मया बिन मन नइ लागे,जग के महल अटारी मा।
मोर मयारू मैना आबे,हिरदे के फुलवारी मा।।

मन मंदिर के देवी जानौं,तोला राजकुमारी ओ।
तँय चंदा मँय तोर सुरुज हौं,हमर मया उजियारी ओ।।
जरै भले ओ ये दुनिया हा,का हे दुनियादारी मा।
मोर मयारू मैना आबे,हिरदे के फुलवारी मा।।

सरसी छन्द गीत(२३)

मोर मयारू आबे संझा,लगे मिलन के आस।
नैना तरसे तोर मया बर,बाढ़त हवय पियास।।

सोवत जागत उठते बइठत,सुरता तोर सताय।
का जादू तँय डारे गोरी,सुध-बुध मोर भुलाय।।
जोहत हावँव रद्दा तोरे,मन हा उडे अगास।
मोर मयारू आबे संझा,लगे मिलन के आसll

काम-बुता मा मन नइ लागे,मन ला कुछ नइ भाय।
भाँय-भाँय जिंवरा लागत हे,तन मा घुना समाय।।
बिन देखे तोला ओ रानी,मन हे मोर उदास।
मोर मयारू आबे संझा,लगे मिलन के आस।।

चघे हवय ओ तोर मया के,मोला अबड़ बुखार।
मन के कुरिया सुन्ना लागै,सुन्ना हे संसार।।
मन अँधियारी तोर मया बिन,तँय हा मोर उजास
मोर मयारू आबे संझा,लगे मिलन के आस।।

कुकुभ छंद गीत(२४)

चंदन जइसे काया गोरी,महर-महर ममहाये ओ।
सोन परी तँय जग के रानी,मुचमुच ले मुस्काये ओ।।

काजर आँसे नैना कारी,जइसे बादर हारे हे।
सुरुज उए कस माथ टिकुलिया,मन ला मोही डारे हे।।
चंदा लागे तोर रूप हा,उजियारा बगराये ओ।
चंदन जइसे काया गोरी,महर-महर ममहाये ओ।।

आनी-बानी गहना गोंटी,अंग अंग मा तँय साजे। 
गोरी गोरी तोर पाँव मा,रुनुक-झुनुक पैरी बाजे।।
कारी नागिन चूँदी जेमा,गजरा ला अरझाये ओ।
चंदन जइसे काया गोरी,महर-महर ममहाये ओ।

फूल झरे ओ तोर हँसी मा,मन भौंरा हा माते हे।
खनर-खनर चूरी कँगना हा,गीत मया के गाते हे।।
रूप मोहनी जादू-मंतर,जग ला तँय भरमाये ओ
चंदन जइसे काया गोरी,महर-महर ममहाये ओ।

कुकुभ छंद गीत(२५)

मन बगिया मा आबे रानी,मन भौंरा गीत सुनाये।
तोर अगोरा हावय मोला,सुरता हा तोर सताये।।

मया-पिरित के फूल फुले हे,आ रानी ममहाबे ओ।
नैन मिला के मया बढ़ा के,मया अमर कर जाबो ओ।।
आजा रानी छोड़ बहाना,जोही ओ तोर बुलाये।
मन बगिया मा आबे रानी,मन भौंरा गीत सुनाये।

तोर बिना सुख्खा बगिया हा,कइसे ओ हरिया पाही,
मया-पिरित के फूल नार हातोर बिना मुरझा जाही।।
डार मया के पानी जोही,सउँहे ओ प्यास बुझाये।
मन बगिया मा आबे रानी,मन भौंरा गीत सुनाये।


ताटंक छंद गीत (२६)

मया छोड़ के झिन जाबे तँय,मोर मयारू मैना रे।
मन पिंजरा मा बोलत रहिबे,गुत्तुर गुत्तुर बैना रे।।

तपत कुरू रे तपत कुरू भइ,रोटी देहूँ तोला रे।
नाचत रहि तँय मन बगिया मा,देख-देख के मोला रे।।
बँध के रहि तँय मया डोर मा,तहीं मोर फुलकैना रे।
मया छोड़ के झिन जाबे तँय,मोर मयारू मैना रे।

कवल करेजा तोला जानौं,झन देबे तँय पीरा रे।
तोर मया मा मोर जान हे,तँय हा मन के हीरा रे।।
तोला पा के मन हरसाथौं,तहीं मोर दिन रैना रे।
मया छोड़ के झिन जाबे तँय,मोर मयारू मैना रे।।

हिरदे मा राखे हँव तोला,मोर मया के बँधना मा।
उड़-उड़ के तँय खेलत रहिबे,ये हिरदे के अँगना मा।।
ये हिरदे ला चमकाये तँय,तहीं बसे हस नैना रे।
मया छोड़ के झिन जाबे तँय,मोर मयारू मैना रे।

ताटंक छंद गीत(२७)

बइठे-बइठे रद्दा जोहत,होगे अब अँधियारी रे।
तोर अगोरा हावय मोला,कब आबे सँगवारी रे।

फरकत हावय जौनी आँखी,आस मिले के लागे हे।
जल्दी आजा मोर मयारू,आज मया बड़ जागे है।।
तोर मया बर चोला तरसे,धधकय धतिया भारी रे।
बइठे-बइठे रद्दा जोहत, होगे अब अँधियारी रे।

एक झलक देखे बर राजा,चूरत हावय चोला गा।
कहाँ भुलाये हावस तँय हा,सुध नइ हे का तोला गा।।
अब्बड़ बेरा होगे हावय,घर मा देहीं गारी र।
बइठे-बइठे रद्दा जोहत,होगे अब अँधियारी रे।

मया अगन हा बाढ़त हावय,आके प्यास बुझाते गा।
इहाँ अक्केला बइठे हावँव,आते बोल बताते गा।।
चुप-चुप आबे मोर पिरोही,करथे कतको चारी रे।
बइठे-बइठे रद्दा जोहत,होगे अब अँधियारी रे।।

उल्लाला छंद गीत (२८)

बिरथा जिनगी हे गियाँ,तोर बिना अब मोर ओ।
नैना तरसे रात दिन,आना ले ले सोर ओ।।

अन पानी भावै नहीं,लगे मिले के आस मा।
दुरिहा काबर होय तँय,आजा रानी पास मा।।
बिरहा आगी मा जरौं,सुरता लेशय तोर ओ।
बिरथा जिनगी हे गियाँ,तोर बिना अब मोर ओl

तन के पीरा का कहौं,झर-झर नैना रोत हे।
तोला देखे बर इहाँ,भुकुर-भुकुर मन होत हे।।
सुने नींद आवै नहीं,लामे सुरता डोर ओ।
बिरथा जिनगी हे गियाँ,तोर बिना अब मोर ओll

आ रानी बरसा मया,जिनगी मोर सँवार दे।
अँधियारी जिनगी हवै,आके तँय उजियार दे।।
सुन रानी गोहार ला,हिरदे ला झिन टोर ओ..
बिरथा जिनगी हे गियाँ,तोर बिना अब मोर ओll

लावनी छंद गीत श्रृंगार(२९)
 
कुहके कारी कोयलिया हा,चल अमरइया जाबो ओ।
सनन-सनन पुरवइया रानी,राग मया के गाबो ओ।।

पीपर पाना कस मन डोले,मैना ताना मारत हे।
तोर बिना ओ सुन सँगवारी,नैना आँसू ढ़ारत हे।
पबरित हावय हमर मया हा,दुनिया ला दिखलाबो ओ।
कुहके कारी कोयलिया हा,चल अमरइया जाबो ओ।।

किसम-किसम के महकत हावय,अमरइया मा फुलवा हा।
तोर बिना ओ सुन्ना जोही,अमरइया के झुलवा हा।।
सरग बरोबर लागे छइँहा,मया-पिरित बरसाबो ओ।
कुहके कारी कोयलिया हा,चल अमरइया जाबो ओ।।

नाचत गावँय पड़की मैना,मिलके तान सुनावत हें।
ए डारा ले ओ डारा मा,उड़-उड़ के मुस्कावत हे।।
मया अमर करबो चल जोही,बने खुशी ला पाबो ओ।
कुहके कारी कोयलिया हा,चल अमरइया जाबो ओ।।

कुकुभ छंद गीत (३०)

काबर मोला छोड़े जोही,मैना सहीं उड़ागे ओ।
खोजत हावँव बन-बन तोला,कइसे मया भुलागे ओ।।

तोला देखे बर सँवरेंगी,तरसत हावय नैना हा।
लटपट मा ये दिन ला काटौं,कटै नहीं ओ रैना हा।।
बनके तँय परदेशी चंदा,जाके कहाँ लुकागे ओ।
काबर मोला छोड़े जोही,मैना सहीं उड़ागे ओ।।

सुरता आथे तोर मया के,देखत रहिथौं सपना ओ।
जिनगी मा होगे हावय अब,तोर नाँव के जपना ओ।।
ये हिरदे के पिंजरा ला तँय,बैरी सहीं तियागे ओ।
काबर मोला छोड़े जोही,मैना सहीं उड़ागे ओ।।

कोन डहर तोला मँय पावौं,खोजँव आरा-पारा मा।
पता मिलै नइ शोर तोर ओकहाँ धँधाये तारा मा।
अन पानी नइ भावै मोला,चोला मोर सुखागे ओ
काबर मोला छोड़े जोही,मैना सहीं उड़ागे ओ।।

ताटंक छंद गीत(३१)

लाली पिंवरी लुगरा पहिरे,अँचरा ला उड़वाये ओ
कारी नागिन चूँदी जेमा,गजरा ला अरझाये ओ।

पातर-पातर कनिहा गोरी,अब्बड़ लिच-लिच डोले ओ।
खनर-खनर चूरी अउ कँगना,भेद मया के खोले ओ।।
पान खाय कस होंठ दिखत हे,मुचमुच ले मुस्काये ओ
लाली पिंवरी लुगरा पहिरे,अँचरा ला उड़वाये ओ।

कंचन काया दमकत हावय,रूप रंग हा गोरी हे।
नज़र लगाही कोन तोर बर,बँधे बाँह मा डोरी हे।
गर मा सोहे हार सोनहा,धरके मन हरसाये ओ..
लाली पिंवरी लुगरा पहिरे,अँचरा ला उड़वाये ओ

काबर आँजे काजर कारी,मिरगिन जइसे नैना मा।
काय मोहनी जादू डारे,गुत्तुर गुत्तुर बैना मा।।
चम-चम चमके माथ टिकुलिया,बिजुरी ला बगराये ओ।।
लाली पिंवरी लुगरा पहिरे,अँचरा ला उड़वाये ओ

सार छंद गीत-(३२)

तँय आ जाबे मोर पिरोही,अउ कतका तड़पाबे।
मन बगिया हा मुरझावत हे,मयापिरित बरसाबे।

एक नज़र देखे बर तोला,चूरत रहिथे चोला।
माला जपथौं तोर नाँव के,का होगे हे मोला।।
नज़र-नज़र मा झूलत रहिथस,कब तँय दरश दिखाबे।
तँय आ जाबे मोर पिरोही,अउ कतका तड़पाबे।

जागे-जागे सपना देखौं,सुध-बुध मोर भुलाये।
तन-मन मा तँय मोर समाये,सुरता तोर सताये।।
मीठ-मीठ मँदरस कस बोली,आके तोर सुनाबे
तँय आ जाबे मोर पिरोही,अउ कतका तड़पाबे2

सार छंद गीत श्रृंगार रस-(३३)

देखे काबर गोरी मोला,धक-धक करथे चोला।
नैन कटारी झिन मारे कर,तोर उमर हे सोला।।2

मटमट मटमट करते रहिथस,मुच-मुच ले मुस्काथस।
अइसन काबर लाहो लेथस,अब्बड़ तँय इतराथस।।
मार मारके शेखी भारीखाथस चुस्की गोला...
देखे काबर गोरी मोलाधक-धक करथे चोला.l

आनी बानी किरिम पाउडर,मुँह मा तोर लगाथस।
का साबुन मा रोज नहाथस,अब्बड़ ओ ममहाथस।।
लकर-धकर तँय रेंगे धरके,मोबाइल अउ झोला.
देखे काबर गोरी मोला धक-धक करथे चोलाll2

उल्लाला छंद गीत श्रृंगार रस-(३४)

रूप लगे मन मोहनी,चंदा घलो लजाय हे।
चर्चा होवय गाँव मा,तोला कोन बनाय हे।।

मोती जइसन दाँत हा,चमकत हावय तोर ओ।
का संझा का रात के,जग ला करै अँजोर ओ।।
गोरी गोरी अंग हा,जादू अबड़ चलाय हे।
रूप हवय मन मोहनी,चंदा घलो लजाय हे।।

झुमका सोहे कान के,झूमय नाँचय गाल मा।
लिच-लिच कनिहा डोलथे,मन डोलत हे चाल मा।
हँसथस ता फुलवा झरे,महर-महर ममहाय हे।
रूप हवय मन मोहनी,चंदा घलो लजाय हे।।
होठ गुलाबी तोर ओ,मँदरस ला टपकाय हे।
रूप हवय मन मोहनी,चंदा घलो लजाय हे।।

ताटंक छंद गीत श्रृंगार रस-(३५)

मन के रानी मोर मोहनी,मन ला अब्बड़ भाये ओ।
रूप गजब हे नैन जोगनी,बिजुरी ला चमकाये ओ।।

मोर पिरोही मोर मयारू,मोर तहीं फुलकैना ओ।
नीक-नीक लागे अब्बड़ मोला,मीठ-मीठ हे बैना ओ।। 
सोन परी हिरदे के चंदा,मया अँजोरी लाये ओ..
मन के रानी मोर मोहनी,मन ला अब्बड़ भाये ओ।।

हस अलबेली रे सँवरेंगी,मुचमुच ले मुस्काये ओ।
तोर हँसी मा झरे मोंगरा,मन बगिया महकाये ओ
अंग-अंग महमावत हावै,हिरदे मा तँय छाये ओ
मन के रानी मोर मोहनी,मन ला अब्बड़ भाये ओ।।

ताटंक छंद गीत श्रृंगार रस-(३६)

नदिया के तिर आबे रानी,तोर अगोरा मोला हे।
सुरुर सुरुर पुरवाही चलथे,हरसत अब्बड़ चोला हे।।

आनी-बानी फूल फुले हे,भौंरा हा मँडरावै ओ।
कुहके आमा डार कोयली,मैना राग सुनावै ओ।।
मन भौंरा हा खोजत हावय,का चिंता अब तोला हे।
नदिया के तिर आबे रानी,तोर अगोरा मोला हे।।

आगी जइसे तन भभकत हे,आके प्यास बुझाते ओ।
मया-पिरित के गोठ-बात मा,आके मन हरसाते ओ।।
तोर मया बिन ये हिरदे मा,बरसे आगी गोला हे।
नदिया के तिर आबे रानी,तोर अगोरा मोला हे।।

नदिया के पानी कस धारा,आँसू बोहत हे भारी।
तोर दरश बिन ये हिरदे मा,बिरहा के चलथे आरी।।
तोर बिना मन अइलावत हे,चलत झाँझ अउ झोला हे।
नदिया के तिर आबे रानी,तोर अगोरा मोला हे।।

ताटंक छंद गीत-(३७)

चल सँगवारी हम बर जाबो,बनके दीया बाती ओ।
सुरुज नरायन जइसे बरबो,का दिन अउ का राती ओ।।

जिनगी के अँधियारी कखरो,घर के धूर भगाबो ओ।
उजियारी हो जाही जिनगी,बरके नाँव कमाबो ओ।।
सदा आरती देवन मन बर,बरबो हम संझाती ओ।
चल सँगवारी हम बर जाबो,बनके दीया बाती ओ।।

गली दुवारी बरते रहिबो,ख़ुशी सबो घर लाबो ओ।
जतको बरबो ततके संगी,सुख देबो सुख पाबो ओ।।
मया अमर कर लेबो हमरो,लगे लगे हम छाती ओ।
चल सँगवारी हम बर जाबो,बनके दीया बाती ओ।।

ताटंक छंद पुन्नी के चंदा कस-(३८)

पुन्नी के चंदा कस हावय,तोर रूप हा गोरी ओl
संग लगाले मोला जोही,बाँध मया के डोरी ओll

नैन जोगनी जइसे हावय,बिजुरी ला चमकाये हेl
चमकत हावय कंचन काया,उजियारा बगराये हेll
मुचमुच ले मुस्काये काबर,दिल के होगे चोरी ओl
पुन्नी के चंदा कस हावय,तोर रूप हा गोरी ओll

करिया बादर जइसे चूँदी,कनिहा ले लहराये हेl
फुरहुर छइँहा चारों कोती,धरती मा बगराये हेll
झाँक मयारू मया डगर ला,करले बँइहाँ जोरी ओl
पुन्नी के चंदा कस हावय,तोर रूप हा गोरी ओll

सरसी छंद गीत युगल-(३९)

नायक-
मोर मया वाले तँय रानी,मँय राजा दिलदार।
मया-पिरित बरसाबो रानी,आबे  तरिया पार।

अंतरा-नायिका
घर मा अब्बड़ काम परे हे,कइसे आवँव पास।
मया-पिरित के ए गा राजा,लगे महूँ ला आस।।
नायक-
बने बहाना करके आजा,आज हवय इतवार।
मोर मया वाले तँय रानी,मँय राजा दिलदार।।

गायक-
तोर अगोरा मोला हावय,सुरता तोर सताय।
मया-पिरित के गोठ करे बर,जोही तोर बुलाय।।
गायिका-
आवत हावँव मोर मयारू,रहिबे गा तइयार।
मोर मया वाले तँय राजा,मँय रानी दिलदार।।

सार छंद(४०)

जोही काबर छोड़े मोला,कइसे मया भुलागे।
मोर मया मा महुरा घोरे,कइसे मया तियागे।।

नइ पाबे अब तँय हा रानी,मोर सहीं दीवाना।
तोही ला मँय मितवा जानौं,नइ हे मोर ठिकाना।
तोर अगोरा मा चंदा रे,सगरी उमर पहागे।
जोही काबर छोड़े मोला,कइसे मया भुलागे।।

बिरहा के बिख ला पीयत हँव,कइसन ये लाचारी।
सुरता के तरिया मा बूडौं,जिनगी हे अँधियारी।।
का गलती हे मोर बिधाता,कइसे गियाँ रिसागे।
जोही काबर छोड़े मोला,कइसे मया भुलागे।।


सार छंद सुरता-(४१)

सुरता सुरता ये सुरता के,लामे हावय डोरी।
नजरें नजर म झूलत रहिथे,तोर रूप हा गोरी।।

एक नजर देखे बर तोला,जिंवरा मोर लगे हे।
रतिहा-रतिहा जागत रहिथौं,मन मा आश जगे हे।।
तोर बिना ओ अइसे लगे,दिल के होगे चोरी।
सुरता सुरता ये सुरता के,लामे हावय डोरी।।

कान-कान मा गूँजत रहिथे,मीठ-मीठ वो बोली।
तोर बिना ये नैना रोथे,दिल मा चलथे गोली।।
बिरहा मा तन जरथे जोही,जइसे जरथे होरी।
सुरता सुरता ये सुरता के,लामे हावय डोरी।।


चौपाई छन्द गीत श्रृंगार रस-(४२)

रूप नगर के तँय रानी ओ,ख़ुशी तोर हे जिनगानी ओl
अंग-अंग गहना साजे हे,खनर-खनर चूरी बाजे हेll

मया राग कंगना बोलत हे,अंतस मा मँदरस घोलत हे।
चंदा के टिकली चमकत हे,सोन सहीं काया दमकत हेll
दया-मया तोर कहानी ओ,रूप नगर के तँय रानी ओ।
रूप नगर के तँय रानी ओ,ख़ुशी तोर हे जिनगानी ओl

काने मा बाली डोलत हे,मया-भेद कइसे खोलत हेl
बेनी के गजरा महकत हे,पैरी चिरई कस चहकत हेll
अब्बड़ हे तोर कहानी ओ,रूप नगर के तँय रानी ओ।।
दया-मया तोर कहानी ओ,रूप नगर के तँय रानी ओ।।

सरसी छन्द गीत श्रृंगार रस(४३)

आँखी हावय कजरारी ओ,ढ़ीले चोखी बान।
होंठ दिखत हे लाली-लाली,खाये बीरो पान।।

करिया चूँदी नागिन जइसे,कनिहा ले लहराय।
बेनी के ओ फूल मोंगरा,महर महर ममहाय।।
मटक मटक के रेंगे गुँइया,मारे अब्बड़ शान।
आँखी हावय कजरारी ओ,ढ़ीले चोखी बान।।

रूप लगे जस तोर मोहनी,गोरी-गोरी अंग।
तोर नाक मा चमकत हावय फुल्ली के ओ नंग।।
खनर-खनर ओ चूरी गावय,मया-पिरित के गान।
आँखी हावय कजरारी ओ,ढ़ीले चोखी बान।।

कुकुभ गीत -(४४) 
होरी..

मया पिरित के रंग डार के,बने मनाबो होरी ओ।
आज लुका झन घर मा जोही,रंग लगाले गोरी ओ।।

सुन सतरंगी मोर मयारू,बाजत ढ़ोल नँगारा हे।
सब खेलत हें गाँव गली मा,फगुवा झारा-झारा हे।।
फाग मया के मिलके गाबो,झन कर जोरा जोरी ओ।
आज लुका झन घर मा जोही,रंग लगाले गोरी ओ।।

मया रंग बरसाबो संगी,कुलके मन हा अब मोरो।
मया पिरित ला जान मयारू,का सुध नइ हे अब तोरो।
मया बढ़ा के नैन मिला के,करे हवस मन चोरी ओ
आज लुका झन घर मा जोही,रंग लगाले गोरी ओ।।

देख निकल के घर ले बाहिर,तोर दुवारी आये हौं।
झन शरमाना ये अलबेली,मया तोर बर लाये हौं।

फागुन महिना मया बढ़ावय,बाँध मया के डोरी ओ।
आज लुका झन घर मा जोही,रंग लगाले गोरी ओ।।

ताटंक छंद गीत(४५)

गीत कोइली जब-जब गाथे,सुध बुध मोर हराथे ओ।
धकधक-धकधक जिंवरा करथे,सुरता तोर सताथे ओ।।

रंग बिरंगी फूल फुले कस,दिखथे तोर हँसाई हा।
गुत्तुर गुत्तुर तोर गोठ मा,महके मन अमराई हा।।
बादर सुरता के जब छाथे,बिरहा पीर बढ़ाथे ओ।
गीत कोइली जब जब गाथे,सुरता तोर सताथे ओ।।

मया मतौना सुध बुध खोथे,खोजत रहिथे मन तोला।
तोर बिना ओ मोर मयारू,तरसत रहिथे ए चोला।।
जुड़ पुरवाही जब जब चलथे,अब्बड़ मया बढ़ाथे ओ।
गीत कोइली जब जब गादथे,सुरता तोर सताथे ओ।।

दोहा गीत..(४६)

मन बगिया के कोइली,तोर करे ओ बात।
तोर मया हा फूल कस,महके हे दिन-रात।।

मन के चंदा मोर तँय,मँय हा तोर अगास।
चिटिक अँजोरी छाँव मँय,तँय हा मोर उजास।।
उलहा अंतस ला करे,मया तोर बरसात।
मन बगिया के कोइली,तोर करे ओ बात।।

जुड़हा पुरवाही सहीं,लगे तोर ए साँस।
तोर मोहनी रूप हा,मन ला लेहे फाँस।।
जब-जब देखँव रे गियाँ,तोला मँय मुस्कात।
मन बगिया के कोइली,तोर करे ओ बात।।

बरवै छंद गीत-(४७)

गियाँ बिना नइ आवय,मोला चैन।
ऐती ओती खोजत,रहिथे नैन।।

अइसे लगथे होगे,गियाँ पराय।
कोन शहर मा जाके,कहाँ धँधाय।।
धधकत रहिथे चोला,लगगे आग।
गियाँ मिले बर छेड़य,मन हा राग।।
लटपट मा कटथे दिन,बिरहा रैन।
गियाँ बिना नइ आवय,मोला चैन।।

देखे बर अब रोवय,चोला मोर।
निरदइया हे लेवत,नइ हे सोर।।
अंतस मा अब छाये,ओखर रूप।
गियाँ बिना जग लागय,मोला कूप।।
सुरता आवय छिन-छिन,गुरतुर बैन।
गियाँ बिना नइ आवय,मोला चैन।।

कुकुभ छंद गीत (४८)

आँखी के काजर हा लागय,जइसे बादर छाये हे।
ये आँखी मा का जादू हे,अब्बड़ मन ला भाये हे।।

चाँद बरोबर तोर माथ मा,सोहे लाल टिकुलिया हा।
अइसे लागय चारो कोती,चमकय ठाढ़ बिजुरिया हा।।
झाँक-झाँक के देखे काबर,मन मा कोन समाये हे।
आँखी के काजर हा लागय,जइसे बादर छाये हे।।

तोर कनेकी नज़र गियाँ रे,घायल ओ कर देही का।
करिया नागिन जइसे चूँदी,जिंवरा ला ले लेही का।।
सोन परी तँय जग मा तोला,कोन विधाता लाये हे।
आँखी के काजर हा लागय,जइसे बादर छाये हे।।

कुंकुभ छंद गीत..श्रृंगार रस-(४९)

तँय बन जाबे गोंदा फुलवा,मँय भौंरा बन जाहूँ।
तोर महक मा मँय हा गोंदा,महर-महर ममहाहूँ।।

तोर मया के रस ला चंदा,अमरित जइसे पीहूँ।
देख देख के आठो पहरी,ये जिनगी ला जीहूँ।।
ओ डारा ले ये डारा मा,उड़ उड़ के मँय आहूँ
तँय बन जाबे गोंदा फुलवा,मँय भौंरा बन जाहूँ।।

अमर कहानी मया-पिरित के,दुनिया मा रहि जाही।
हमर मया हा सब मनखे के,अब्बड़ मन ला भाही।।
गुनगुन-गुनगुन तिर मा सुग्घर गीत मया के गाहूँ 
तँय बन जाबे गोंदा फुलवा,मँय भौंरा बन जाहूँ।।

ताटंक छंद गीत..श्रृंगार रस(५०)

ए चंदा रे ए गुँइयाँ रे,मया तोर बर लागे ना।
खवा डरे तँय मया मतौना,एदे मन मा छागे ना।।

तोर मया मा मोर मयारू,होगे हवँव दिवाना ओ।
आठो पहरी तोर नाँव के,गावत रहिथँव गाना ओ।।
बइठे-बइठे देखँव तोला,जम्मो दु:ख हरागे ना।
ए चंदा रे ए गुँइयाँ रे,मया तोर बर लागे ना।।

तोर सहीं दिलवाली पाके,जिंवरा नाँचे गाये हे।
खुशी मनाथँव तोर मया के,अब्बड़ मन हरसाये हे।।
माला जपथौं तोर नाँव के,मन मा तहीं समागे ना।
ए चंदा रे ए गुँइयाँ रे,मया तोर बर लागे ना।।

सार छंद गीत-(५१)

आँखी ले आँसू बरसत हे,भींजत हावय दसना।
अब तो आजा मोर मयारू,सुन ले मोर कलपना।

तन के पीरा कोन हरय अब,काला मँय दुख बाँटौं।
बिरहा लागय जाहर जइसे,दुख के ढ़ेरा आँटौं।।
आठो पहरी होथे जोड़ी,तोर नाँव के जपना।
आँखी ले आँसू बरसत हे,भींजत हावय दसना।

अब्बड़ सुरता तोर सताथे,धक-धक जिंवरा करथे।
जिंवरा तड़फत रहिथे भारी,आगी जइसे बरथे।।
तोर रूप के देखत रहिथौं,जागे जागे सपना।
आँखी ले आँसू बरसत हे,भींजत हावय दसना।

ताटंक गीत(५२)
चंदा उतरे हे भुँइयाँ मा,तइसे लगथस गोरी ओ।
तोर रूप मा ये दुनिया हा,होवत हवे अँजोरी ओ।।

चमकत बिजली जइसे आँखी,जेमा फभथे काजर हा।
छाय घटा कस ये काजर हा,जइसे हारे बादर हा।।
कोन तोर बर नजर लगाही,पहिरे करिया डोरी ओ।
चंदा उतरे हे भुँइयाँ मा,तइसे लगथस गोरी ओ।।

रूप-रंग हे हीरा जइसेपाये उज्जर काया ला,
सरग सुंदरी अतका काबर,बगराये तँय माया ला।।
तोर होठ के लाली जोही,जिवरा के करथे चोरी ओ।
चंदा उतरे हे भुँइयाँ मा,तइसे लगथस गोरी ओ।।


सरसी छंद गीत-(५३)

बेलबेलही टूरी अब्बड़,मारय शेखी शान।
ओंठ रचाये लाली-लाली,खाके बीरो पान।।

मटक-मटक के रेंगत हावय,कनिहा ला लछकाय।
ममहावत हे फूल मोंगरा,चूँदी मा अरझाय।।
कजरेली बड़ काजर वाले,नैना चोखी बान।
बेलबेलही टूरी अब्बड़,मारय शेखी शान।।

गर मा चम-चम चमके भारी,नव लख्खा के हार।
आनी-बानी गहना गोंटी,फभे कान मा ढ़ार।।
मँदरस जइसे गुत्तुर बोली,मुच-मुच ले मुस्कान।
बेलबेलही टूरी अब्बड़,मारय शेखी शान।।

 ताटंक गीत  (५४)

कब ले दुरिहा रहिबे तैं हा,मोर मया संगवारी रे।
तोर बिना अब सुन्ना लागे,घपटे जग अँधियारी रे।।

सुरता छिन-छिन आथे राजा,धकले करथे छाती हा।
का होगे तोर आय नहीं गा,अब तो चिठ्ठी पाती हा।।
मुरझावत हे तोर बिना अब,मोर मया फुलवारी रे
कब ले दुरिहा रहिबे तैं हा,मोर मया संगवारी रे।।

सपना देखँव तोर मया के,जाग-जाग दिन राती मा।
पखरा लदके जइसे लागय,बिरहा बैरी छाती मा।।
मैं राधा हँव तोर मया के,तहीं मोर बनवारी रे।
कब ले दुरिहा रहिबे तैं हा,मोर मया संगवारी रे।।

*कुकुभ छंद गीत(५५)
सावन झूला झुलबो संगी,मनभावन सावन आगे।
मया-पिरित के डोर बँधे ले,तन-मन हा अब हरसागे।।

मोर कहे ला मान गड़ी अब,चल जाबो हम अमराई।
गीत मया के मिलके गाबो,फुरहुर पाबो पुरवाई।।
अइसे करबो गोठ मया के,दुख पीरा जम्मो भागे।
सावन झूला झुलबो संगी,मनभावन सावन आगे।।

हरियर-हरियर चारो कोती,दिखथे धनहा डोली हा।
तान सुना के मन ला मोहय,आज कोइली बोली हा।।
लगगे महिना मया-पिरित के,तइसे अब मोला लागे।
सावन झूला झुलबो संगी,मनभावन सावन आगे।।

विष्णु पद छंद गीत(५६)
देखत हावँँव रस्ता तोरे,कब आबे सजना।
तोर बिरह मा होगे हावय,निसदिन के तपना।।

टप-टप टप-टप नैना ले गा,आँसू हा बरसे।
तोला देखे बर सँगवारी,नैना हा तरसे।
अलथ-कलथ रतिहा ला काटौं,आथे बड़ सपना।
देखत हावँँव रस्ता तोरे,कब आबे सजना।।

आजा अब तँय मोर मयारू,दुख-पीरा हरले।
तोर मया मा जीयत हावँँव,सुरता तँय करले।।
तोर नाँव के होगे हावय,माला गा जपना।
*देखत हावँँव रस्ता तोरे,कब आबे सजना।।

बिन पानी के मछरी जइसे,कब ले मँय मरहूँ।
आके प्यास बुझादे जोही,सँउहे मँय तरहूँ।।
सुन्ना-सुन्ना लागे अब्बड़,मोर गली अँगना।
देखत हावँँव रस्ता तोरे,कब आबे सजना।।


कुकुभ गीत (५७)
मोर संग तँय मया बढ़ाके,नाता काबर टोरे ओ।।
कलपत हावय जिंवरा भारी,कइसे महुरा घोरे ओ।।

तोर बिना ए जग अँधियारी,गाँव गली घर सुन्ना हे।
तोर बिरह अब तन ला छेदय,मोर दरद हा जुन्ना हे।।
नइ समझे तँय मोर मया ला,पखरा जइसे फोरे ओ।
मोर संग तँय मया बढ़ाके,काबर नाता टोरे ओ।।

कइसे पाहूँ तोला संगी,तरसत हावय ए चोला।
अन पानी एक्को नइ भावय,का होगे हावय मोला।।
बीच धार मा ए जिनगी के,तँय हा डोंगा बोरे ओ
मोर संग तँय मया बढ़ाके,काबर नाता टोरे ओ।।

कइसे जीहूँ तोर बिना मँय,सुरता मा नैना रोथे।
कोन समझही मोर दरद ला,धक-धक ए छतिया होथे।।
मया-पिरित के ए बँधना ला,बैरी होके छोरे ओ
मोर संग तँय मया बढ़ाके,काबर नाता टोरे ओ।।

विरह गीत सार छंद (५८)
तैं छोड़े काबर ओ चंदा,मोला अपन बनाके।
राखे हावँव तोर मया ला,दिल मा मोर बसाके।।

मोर सहीं दिलवाला राजा,खोजे नइ तो पाबे।
मोर मया के सुरता आही,पाछू बड़ पछताबे।।
करे रहँव मैं तोर भरोसा,किरिया कसम खवाके।
तैं छोड़े काबर ओ चंदा,मोला अपन बनाके।

मोर मया फुलवारी ला तँय,करके चल दे सुन्ना।
कइसे जीहूँ तोर बिना मैं,पीरा बाढ़य दुन्ना।।
बीच भँवर मा कइसे बोरे,जिनगी मोर फँसाके।
तैं छोड़े काबर ओ चंदा,मोला अपन बनाके।।

मया बिना अब होगे जोही,जिनगी मा अँधियारी।
अइलाये कस होगे हावय,मोर मया फुलवारी।।
पंछी कस तैं उड़गे काबर,जिंवरा मोर जलाके।
तैं छोड़े काबर ओ चंदा,मोला अपन बनाके।।

प्रदीप छन्द गीत(५९)

चरदिनिया ए जिनगानी हे,सबले सुघ्घर काम कर।
सत्य राह मा चलके संगी,जग मा ऊँचा नाम कर।

दीन-दुखी से मया बाँट ले,मानवता पहिचान ले।
दया-धरम ला ह्दय बसाके,छुट्टी पा अभिमान ले।।
पर नेकी के काम इहाँ जी,तँय हा आठो-याम कर।
चरदिनिया ए जिनगानी हे,सबले सुघ्घर काम कर।

गुरू,ददा-दाई के सेवा,कर परगट भगवान हे।
माथ नवा ले चरन कमल मा,इँखरे ले उत्थान हे।।
कहाँ भटकबे एती-ओती,मन ला चारोधाम कर।
चरदिनिया ए जिनगानी हे,सबले सुघ्घर काम कर।

लेख लिखा ले सत्य करम के,छोड़ बने जी छाप ला।
सत के करले लेनी-देनी,करले एखर जाप ला।।
जी ले जिनगानी ला हँस के,झन तँय एखर दाम कर।
चरदिनिया ए जिनगानी हे,सबले सुघ्घर काम कर।

सार  छन्द गीत श्रृंगार रस(६०)

रूप मोहनी रंग चाँदनी,आँखी हे कजरेली।
देखे भर मा मया उमड़थे,अंतस मा बरपेली।।

सुरुज नरायण जइसे चमके,तोर माथ के बिंदिया।
तोर कान के झुमका गोरीले जाही का निंदिया।।
फूल फुले हे जग बगिया मा,चम्पा तहीं चमेली।
रूप मोहनी रंग चाँदनी,आँखी हे कजरेली।।(१)

पान खाय कस होंठ रचे हे,छलके मँदरस सागर।
करिया चूँदी कनिहा लोरय,छाये जइसे बादर।।
बाली हावय तोर उमरिया,लगथस ओ अलबेली।
रूप मोहनी रंग चाँदनी,आँखी हे कजरेली।।

सार छन्द गीत..(६१)

मोर मया ला आज भुलागे,का होगे हे तोला।
तोर बिरह मा नैना रोवय,बरसे आँसू गोला।।

तड़पत हावय जिंवरा भारी।तोर बिना सँगवारी।
सुन्ना सुन्ना लागत हावय।घर अँगना अउ बारी।।
आगी बारे जइसे छिन छिन,धधकय हावय चोला।
मोर मया ला आज भुलागे,का होगे हे तोला ओ।।

करुहा करके मोर मया ला,महुरा काबर घोरे।
मया बढ़ा के बीच भँवर मा,ए जिनगी ला बोरे।।

मोर सहीं तँय नइ तो पाबेहँव सिधवा बड़ भोला।
मोर मया ला आज भुलागे,का होगे हे तोला।।

सरसी छन्द गीत(६२)
*गायक*
अतका अच्छा काबर लगथे,रूप रंग हा तोर
आज बतादे मोला गोई,हावस का चितचोर।।
*गायिका*
रूप रंग मा झन जा राजा,मँय हँव गा दिलदार।
मया भरे हावय अंतस मा,इही जगत मा सार।।
*गायक*
कोन बिधाता गढ़े हवय ओ,कंचन काया पाय।
रूप नगर के तँय हा रानी,दुनिया ला भरमाय।
अइसे लगथे बाँध डरे तँय,मया पिरित के डोर।
अतका अच्छा काबर लगथे,रूप रंग हा तोर।।
*गायिका*
कंचन काया नोहय राजा,हाड़ मास के ताय।
एखर करके काय भरोसा,काबर गा ललचाय।।
चरदिनिया हे ए जिनगानी,जोड़ मया के तार।
रूप रंग मा झन जा राजा,मँय हँव गा दिलदार।।


दोहा गीत(६३)
*लड़का*
आ जोही तँय बाँध ले,मया पिरित के डोर।
जिनगी भर करबो मजा,सुख पाबो चहुँओर।।

जात पात ला छोड़ के,हम बन जाबो मीत।
सदा निभाबो संग मा,हमर मया के रीत।।
रानी बन जा मोर ओ,बनहूँ राजा तोर।
आ जोही तँय बाँध ले,मया पिरित के डोर।।(१)
*लड़की*
नशा करत होबे कहूँ,तेला तुरते छोड़।
बिना नशा के मोर ले,तँय हा नाता जोड़।
जब तक चलही साँस हा,बनके रइहूँ तोर।
आ जोही तँय बाँध ले,मया पिरित के डोर।।(२)

मानव छंद गीत(६४)
मात्रा भार-14-12
*गायक*
झन देबे धोखा तँय हा,मोला सँगवारी रे।
हो जाही तोर मया बिन,जिनगी अँधियारी रे।
महकाबे मोर मया ला-2बनके फुलवारी रे।
झन देबे धोखा तँय हा,मोला सँगवारी रे।

अंतरा(१) *गायिका*
कब तँय पतियाबे राजा,अब्बड़ हे पिरिया गा।
तोर बिना कइसे जीहूँ,खावत हँव किरिया गा।
अँधियारी हे जिनगी मा-2करहूँ उजियारी रे।
नइ देवँव धोखा मँय हा,तोला सँगवारी रे।

अंतरा(२) *गायक*
बैरी ए दुनिया हावय,बचके अब रहना हे।
कतको सुख दुख आही ता,मिलके ओ सहना हे।
तहीं मोर राधा रानी,-2मँय हा बनवारी रे।
झन देबे धोखा तँय हा,मोला सँगवारी रे।


कुकुभ गीत(६५)
मया बढ़ाके मोर संग मा,काबर नाता टोरे ओ।।
कलपत हावय जिंवरा भारी,कइसे महुरा घोरे ओ।।

तोर बिना ए जग अँधियारी,गाँव गली घर सुन्ना हे।
तोर बिरह अब तन ला छेदय,मोर दरद हा जुन्ना हे।।
नइ समझे तँय मोर मया ला,पखरा जइसे फोरे ओ।
मया बढ़ाके मोर संग मा,काबर नाता टोरे ओ।।

कइसे पाहूँ तोला संगी,तरसत हावय ए चोला।
अन पानी एक्को नइ भावय,का होगे हावय मोला।।
बीच धार मा ए जिनगी के,तँय हा डोंगा बोरे ओ।
मया बढ़ाके मोर संग मा,काबर नाता टोरे ओ।।

कइसे जीहूँ तोर बिना मँय,सुरता मा नैना रोथे।
कोन समझही मोर दरद ला,धक-धक ए छतिया होथे।।
मया-पिरित के ए बँधना ला,बैरी होके छोरे ओ
मया बढ़ाके मोर संग मा,काबर नाता टोरे ओ।।

सार छंद गीत(६६)
*गायक*
मीठ मीठ मिसरी के जइसे,गोठ बात होगे ओ।
तोर संग मा चंदा रानी,मुलाकात होगे ओ।।
*गायिका*
मीठ मीठ मिसरी के जइसे,गोठ बात होगे ना।
तोर संग मा छैला राजा,मुलाकात होगे ना।।२
*गायक*
नजर मिला के जी भर के तँय,देख मयारू मोला।
तोर मया ला हृदय बसाके,मँय देखँव ओ तोला।।
लहराये तँय करिया चूँदी,हँसी रात होगे ओ।
मीठ मीठ मिसरी के जइसे,गोठ बात होगे ओ।।
*गायिका*
देख देख के एक दुसर ला,तन मन ला हरसाबो।
हमर मया के बगिया संगी,मिलके हम महकाबो।।
ए दुनिया मा हमर मया के,शुरूवात होगे ना।।
तोर संग मा छैला राजा,मुलाकात होगे ना।।


वियोग श्रृंगार रस(६७)
राधेश्यामी छंद गीत

आजा मोर मयारू दौना ,सुरता तोर सताथे मोला।
तोर मया बर तड़पत रहिथौं,खोजत रहिथौं बन बन तोला।।

तोर बिना मँय कइसे जीयँव,काटँव हँव दुख के बेरा ला।
मोर दरद ला कोन समझ ही,आँटत हँव दुख के ढेरा ला।।
तोर दरश पाये बर जोही,छिन छिन चूरत रहिथे चोला।।
आजा मोर मयारू दौना,सुरता तोर सताथे मोला।।

मन कुरिया मा मोर पिरोही,हावय अब तोर बसेरा ओ।
तोर नाँव ले जिनगी बीतय,ठाढे बिरहा के घेरा ओ।।
ए छतिया हा धधकत रहिथे,झरे नैन ले आँसू गोला।
आजा मोर मयारू दौना,सुरता तोर सताथे मोला।।

हरिगीतिका छंद गीत श्रृंगार -(६८)

ए तोर नैना हाय दौना मारथे बड़ बान ओ।
लचकाय काबर तोर कनिहा लेत हावै जान ओ
*चूँदी सजाये तोर तँय हा मोंगरा के फूल मा।*
*मन मोहडारे मोहनी तँय तोर खोपा झूल मा।*

*चंदा सहीं हे रूप जोही तोर उज्जर अंग हे।*
*ए चकमकावै नाक फुल्ली सोनहा के नंग हे।* 
लाली दिखत हे होठ सुग्घर खाय बीरो पान ओ
*ए तोर नैना हाय दौना मारथे बड़ बान ओ

*बड़ नीक लागे रेंगना ओ पाँव पैरी बोलथे।*
*ए छमछमावत गीत गाथे भेद मन के खोलथे।*
*हे कोइली कस तोर बोली मीठ मँदरस घोरथे।*
*चूरी सजाये बाँह भर भर कान बाली लोरथे।*

अब्बड़ सजाये तोर गर मा नौ लखा के हार तँय
कंचन सहीं हे तोर काया भाय मन ला यार तँय
रानी बरोबर रूप गोरी सोभथे मुस्कान ओ।
ए तोर नैना हाय दौना मारथे बड़ बान ओ।।

*गीतिका छंद गीत-नानपन के दोस्ती-(६९)

नानपन के दोसती ला,तँय कभू झन टोरबे।
राख बँधना बाँध जोही,संग ला झन छोरबे।।
झन भुलाबे यार मोला,हाथ गुँइया थाम ले।
तँय मया हिरदे लगा ओ,द्वारिका के नाम ले।।

चार दिन के ये जवानी,हे गियाँ झन बोरबे।
नानपन के दोस्ती ला,तँय कभू झन टोरबे।।

चल अमर करबो मया ला,बात जोही मान ले।
ये जमाना काय करही,तँय मया ला जान ले।
रेंगबो हम संग जोही,हाथ धरके हाथ मा।
तँय बताना तोर गोई,माँग भरदँव माथ मा।।

तँय निभाबे रीत सुग्घर,मीठ मिसरी घोरबे।
नानपन के दोसती ला,तैं कभू झन टोरबे।।

चौपाई छंद गीत-(७०)

सुरता मा नैना रोथे रे,धुकुर पुकुर चोला होथे रे।
बिरहा तन लेशय आजा गा,टुकुर टुकुर देखँव राजा गा।

तरसा के मारे मोला रे,रहि रहि चूरत हे चोला रे।।
तोर बिना कइसे जीहूँ गा।कतिक कतिक आँसू पीहूँ गा।।
नैना के काजर धोथे रे,धुकुर पुकुर चोला होथे रे।

लगन मोर मन ला लागे रे,दया मया मन मा जागे रे।।
तार मोर तन के डोलत हे,टुन टुन ये जिवरा बोलत हे।।
राग मया बिरहा बोंथे रे,धुकुर पुकुर चोला होथे रे।

सुरता हा अब्बड़ आथे गारूप तोर मोला भाथे गा।।
बँधे हवँव मन के तारा मा।घुमत-फिरत आते पारा मा।।
मन तोरे कोती खोथे रे,धुकुर पुकुर चोला होथे रे।

श्रृंगार गीत (७१)
मात्रा-भार 
2222 2222 2222 2
बेनी के गजरा दौना अब्बड़ ममहावत हे।
कारी नागिन जइसे ए बेनी लहरावत हे।।

चंदा जइसे माथा के वो टिकली हा बरथे।
संझा बेरा रोज अँजोरी ए जग मा करथे।।
गोरी के सुघराई मा चंदा शरमावत हे।।
बेनी के गजरा दौना अब्बड़ ममहावत हे।।

खनखन-खनखन बाजत हावय गोरी के कँगना।
कनिहा मा चाँदी के करधन सुघ्घर हे बँधना।।
गोरी पातर कनिहा ला कइसे लचकावत हे।
बेनी के गजरा दौना अब्बड़ ममहावत हे।।

अब्बड़ भारी सोहत हावय आँखी के काजर।
छाय घटा हे तइसे दिखथे हारे का बादर।।
देख इहाँ चारो कोती जादू बरसावत हे।
बेनी के गजरा दौना अब्बड़ ममहावत हे।।

गीतिका छंद गीत(७२)
2122 2122 2122 212

मोंगरा के फूल जइसे तोर हे मुस्कान ओ।
तोर सुघराई मयारू ले जही का जान ओ।
महमहावय साँस अब्बड़ का मया रस घोरथे
होंठ लाली तँय रचाये खाय बीरो पान ओ।।

मोह डारे मोहनी ओ तोर माया जाल मा।
मस्त करिया तिल दिखत हे तोर गोरी गाल मा।।
नैन के काजर पिरोही मारथे बड़ बान ओ।।
मोंगरा के फूल जइसे तोर हे मुस्कान ओ।।(१)

दाँत हीरा कस चमकथे जग अँजोरी छाय हे।
कान के झुमका मया के गीत सुघ्घर गाय हे।।
तोर बोली मा निकलथे कोइली के तान ओ।
मोंगरा के फूल जइसे तोर हे मुस्कान ओ।।(२)

चौपाई छंद गीत..(७३)

नइ जानँव दुनियादारी ओ,जानँव तोला सँगवारी ओ।
नइ मारँव झूठ लबारी ओ,मया तोर से हे भारी ओ।।

कर ले ना बँइहाँ जोरी तँय,बाँध मया के ओ डोरी तँय।
जिनगी भर संग निभाहूँ मँय।फूल मया के महकाहूँ मँय।
दे दे तँय मया चिन्हारी ओ,जिनगी ला कर उजियारी ओ।।
नइ जानँव दुनियादारी ओ,जानँव तोला सँगवारी ओ।।

दुनिया ला कतको जलने दे।हमर मया जोही चलने दे।।
जिनगी के काय ठिकाना हे।मया गीत मिलके गाना हे।।
बन जा तँय राजकुमारी ओ,बनगे हँव तोर पुजारी ओ।
नइ जानँव दुनियादारी ओ,जानँव तोला सँगवारी ओ।।


राधेश्यामी छंद गीत(७४)
वियोग श्रृंगार रस

कब आबे मनभौरा छैला,मोर मया के फुलवारी मा।
भटकत हावय ए जिनगी हा,बिना मया के अँधियारी मा।।
कब आबे मनभौरा छैला,मोर मया के फुलवारी मा।

अंतरा(१)
तोर बिना अब ए संगवारी।घाठ घठौंदा सुन्ना लागे,
कइसे जीयँव तोर बिना मँय।तनमन मा ए घुन्ना छागे।
अनपानी नइ भावय मोला,रहिथे थारी-के थारी मा।
कब आबे मनभौरा छैला,मोर मया के फुलवारी मा।।

अंतरा(२)
रद्दा देखँव रोज मयारू,आही अब कहिके तोला गा।
आस मिले के बड़ तरसावय।धकधक करथे ए चोला गा।।
तोर सिवा अब मन नइ लागय,मोला ए दुनियादारी मा।
कब आबे मनभौरा छैला,मोर मया के फुलवारी मा।

गीत(७५)
मात्रा भार-212 212 212 212

एक  दीया  मया  के  जलाबो चलौ
मन के अँधियार मिलके भगाबो चलौ

चार दिन बर मिले जिंदगानी इहाँ।
मोह ममता नता धन दोगानी इहॉं।
मेहनत मा मगन मुस्कुराबो चलौ।
एक दीया मया के जलाबो चलौ।।(1)

काल सच्चा हवय हे कहानी इहॉं। 
काया कच्चा हवय हे निशानी इहॉं।
देह ला देवता कस बनाबो चलौ।
एक दीया मया के जलाबो चलौ।।(2)

रोज बाढ़य गढ़ावै मितानी इहाँ।
मान पावय मया मेहमानी इहाँ।
ए जनम ला सुघर हम पहाबो चलौ।
एक दीया मया के जलाबो चलौ।।(3)

ज्ञान पा के बनौ सब सुजानी इहाँ।
नेक रस्ता म रेंगय सियानी इहाँ।
अब सुरुज के सहीं जगमगाबो चलौ
एक दीया मया के जलाबो चलौ।।(4)

*रास छन्द गीत श्रृंगार रस*(७६)

मया पिरित हा,नइ तो चिनहे,जात गियाँ।
आना करले,मया पिरित के,बात गियाँ।
मया मयारू,लिख ले दिल मा,लेख इहाँ।
दू दिन के ए,जिनगी हावय,देख इहाँ।।

सुख के देहँव,छँइहाँ,मँय दिनरात गियाँ।
मया पिरित हा,नइ तो चिनहे,जात गियाँ।।

तोर नाँव मँय,लिख दे हावँव,जान अपन।
मोला अब तो,जोही तँय हा,मान अपन।
तँय जी लेबे,भले मयारू,मोर बिना।
नइ जी पाहूँ,मँय मर जाहूँ,तोर बिना।

मया पिरित के,करदे तँय बरसात गियाँ।
मया पिरित हा,नइ तो चिनहे जात गियाँ।।

भले जमाना,कतको जर लै,जोर मया।
मोला अब्बड़,भाथे गोई,तोर मया।
मन मंदिर के,देवी तँय हा,मोर बने।
मया पिरोही,मिसरी जइसे, घोर बने।।

मया नशा मा,आना जाबो,मात गियाँ।
मया पिरित हा,नइ तो चिनहे,जात गियाँ।।

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रूप माला आधारित गीत..(७७)
मात्रा भार-
2122 2122 2122 21
रूप लागे फूल गोंदा फूल गोंदा फूल।
कान मा लोरै दिवानी झूमका के झूल..
रूप लागे फूल गोंदा फूल गोंदा फूल।।

अंतरा(१)
रातरानी कस गियाँ ओ अंग हा ममहाय।
तोर ममहाई पिरोही मोर मन ला भाय।
नैन के काजर करेजा मा लगावे शूल...
फूल गोंदा...

अंतरा(२)
तोर ओ सूरजमुखी कस मस्त हे मुस्कान।
पाय हावस का विधाता ले बने वरदान।
मन उदासी लाय के करबे कभू झन भूल..
फूल गोंदा फूल...

कुकुभ गीत(७८)

छाय घटा ये करिया बादर,बरसावत हे पानी।
बिजली चमके बादर गरजे,बरसे बरखा रानी।।

सनन सनन बड़ हवा चलत हे,जाड़ा लागय भारी।
चिखला माते गली खोर मा,डर लागय अँधियारी।।
उमड़ घुमड़ के बरसत हावय,करय अपन मनमानी।
छाय घटा ये करिया बादर,बरसावत हे पानी।


हरियर हरियर रुखुवा होगे,होय मगन फुलवारी।
तरिया नदिया नरवा बाँधा,आगर झलकय धारी।।
ऐती ओती चारो कोती,दउँड़य सबो परानी।
छाय घटा ये करिया बादर,बरसावत हे पानी।।

करम फूल उपजाँवय भइया,ख़ूब करँय जी खेती।
करय किसानी सब मनखे मन,पेट भरे के सेती।।
पटपट पटपट बाजे अब्बड़,चुचवावय जी छानी
छाय घटा ये करिया बादर,बरसावत हे पानी..

सार छन्द गीत श्रृंगार (७९)
(दगा)
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे।
मोर सहीं तँय ये दुनिया मा,संगीनइ तो पाबे।।1

हँव दीवाना तोर नाँव के,सुन ले ओ दीवानी।
रोग मया के लागे हावय,दे दे मया निशानी।।
दीया बारे खोजत रहिबे,मया कहाँ ले लाबे।
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे।।

तोर नाँव के जपथँव माला,सुन ले मन के मैना।
हिरदे के भीतर मा जोही,तिहीं  हवस फुलकैना।
तोर बिना रे मँय मर जाहूँ,कहूँ छोड़ के जाबे।
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे।।

तिहीं मोर ओ चंदा रानी,मन के मोर तिजौरी।
मँय हा तोरे भोले शंकर,तैंहा हावस गौरी।।
हाथ छोड़ के झन तँय जाना,अउ कतका तरसाबे।
कभू दगा झन देबे संगी,नइ ते बड़ पछताबे।।

सार छन्द गीत श्रृंगार (८०)

कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये।
रस्ता तोरे जोहत हावँव,तँय कइसे नइ आये।।

छुनुर छुनुर बड़ पैरी बाजे,बोली गुरतुर बोले।।
मुड़ मा गगरी बोहे गोरी,कनिहा लिच लिच डोले।
धर के गगरी आजा गोरी,जोही तोर बलाये।
कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये।।

बने बहाना करके आबे,भर ले जाबे पानी।
देखे बर ओ नैना तरसे,सुन ले मोरे रानी।।
वो दिन के ओ सुरता आथे,नैना रोज लड़ाये।
कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये।।श

झन तरसाना आजा गोरी,बाँध मया के बँधना।
दे देहूँ मँय चिनहा जोही,खिनवा चूरी कँगना।।
एक झलक देखँव ओ तोला,तरसत हँव बिन पाये।।
कुआँ पार मा बइठे हावँव,सुरता तोर लमाये।।

विरह गीत सरसी छंद (८१)

रहि रहि तोरे सपना आथे,जागत रहिथँव रात।
नैना मा तँय झूलत रहिथस,मन मा करथँव बात।।

रतिहा सपना तोर जगाथे,कर देथे झकझोर।
जाग जाग मँय हुलसत रहिथँव, सुरता आथे तोर।।
आवय नइ ये निंदिया बैरी, का निंदिया के जात।
रहि रहि तोरे सपना आथे,जागत रहिथँव रात।।

सपना मा तँय आके संगी, हरसाये  मन मोर।
आके तँय हा कहाँ भगाथस,बन जाथस चितचोर।।
अलथ कलथ के रात पहावँव,हवय मिले के आस।
सपना मोरे सच हो जातिस,आते जब तँय पास।।

मन भर देख देख के तोला, करँव मया बरसात।
रहि रहि तोरे सपना आथे,जागत रहिथँव रात।
नैना मा तँय झूलत रहिथस, मन मा करथँव बात।
रहि रहि तोरे सपना आथे,जागत रहिथँव रात।।

सार छंद(८२)
वियोग श्रृंगार

अंतस के पीरा ला गोरी,देखे बर तँय आजा।
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा।।1

सपना आके अबड़ सताथे,तरसत हावय चोला।
बोहत रहिथे आँसू झर झर ,सुरता करके तोला।
मन भीतर मा बाजत हावय,गुदुम गुदुम ओ बाजा।
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा।।

तन मन मा ओ तहीं समाये,अनपानी नइ भावय।
घेरी बेरी आथे सुरता,छिन भर नइ तो जावय।।
मन मंदिर मा तहीं बिराजे,आके झलक दिखाजा।
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा।।

मोर दरद ला काला काहँव,सुन लेओ फुलकैना।
तहीं समझ पाबे ओ गोरी,मया पिरित के बैना।।
भरे जवानी हा तड़पत हे,पीरा हावय ताजा।
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा।

आठो पहरी गावत रहिथौं,हमर मया के गाना।
तोर मया बर कलपय जिवरा,झन मोला तरसाना।।
बन के तहीं सुवारी संगी,मोर दुवारी आजा।
तँय मोरे ओ मन के रानी,अउ मँय तोरे राजा।।

सार छन्द गीत(८३)
धक ले जिंवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला।
गदगद मन हो जाथे जोही,तँय देखे ता मोला।

पइरी बाजे छन छन गोरी,मन ला मोही डारे।
नैना तोरे काजर वाले,करिया बादर हारे।।2
मन बउरागे देख देख के,ठाढ़ जवानी सोला।
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला..

फुलकैना तँय मन मा छागे,मन मा मधुरस घोले।
कोयल जइसन गुरतुर हावय,बोली सुग्घर बोले।
कहाँ लुकाये आना जोही, गोजँव बारी कोला।
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला।

बेनी मा ओ सोहे गजरा,फुलवा जइसन हाँसी।
फूल फुले जस आनी बानी,लगथस बारामासी।
बन जा संगी मोर मयारू,तर जाही ओ चोला।
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला।।

बँधे मया के हावय डोरी,नइ छूटय ओ बँधना।
बन जा ओ तँय मोर सुवारी,पहिराहूँ मँय कँगना।
आवत हँव मँय धरे बराती,ले जाहूँ मँय डोला।
धक ले जिवरा करथे गोरी,बिन देखे ओ तोला..

ताटंक गीत(८४)
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा।
का जादू का मंतर मारे,गुरतुर बोली बैना मा।।

आठो  पहरी सुरता आथे,सुधबुध ला भूला डारे।
बन भौंरा  कस माते रहिथौं,मया पिरित लहरा मारे।।
मोर हृदय मा बसके गोरी,दिखथस मन के ऐना मा।
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा।।

मन बगिया के भौंरा मैं हा,चंपा तिहीं चमेली ओ।
कुहु कुहु कुहके मन बगिया मा,कोयल सही नवेली ओ।।
साँवरिया तैं अपन बनाले,गुनते रहिथँव रैना मा।
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा।

चंदा जइसे तोर रूप हे,मन मोरे मोहागे ओ।
अबड़ मया मैं करथौं गोरी,मोर हृदय मा छागे ओ।
कोन जनी का जादू डारे,ये पिंजरा के मैना मा
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा।।

गीतिका छंद-मँय दिवाना-(८५)

मँय दिवाना तोर हावँव,तँय दिवानी मोर ओ।
ए मया ला झन भुलाबे,मोर लेबे शोर ओ।
हे गज़ब के रूप गोई,चाँद हा शरमाय हे।
का बनाये हे बिधाता,मोर मन ललचाय हे।।1

बाँध लैबे आ मयारू,तँय मया के डोर ओ।
मँय दिवाना तोर हावँव,तँय दिवानी मोर ओ।

देंह गोरी सोन जइसे,रूप लागे  फूल हे।
मोह डारे कान के ओ,तोर बाला झूल हे।
माथ के चमके टिकुलिया,टारथे अँधियार ला।
नाक मा फुल्ली बरे जे,मोहथे संसार ला।।

देख के तोला लगे,जइसे मिले सुख भोर ओ।
मँय दिवाना तोर हावँव,तँय दिवानी मोर ओ।

खोंच के ओ तँय किलिप ला,राख चूँदी बाँध के।
छोर अँचरा हा उड़त हे,ढ़ाँक जोंही खाँध के।
मुचमुचाले तँय करौंदा,ये जनम हे सार ओ।
फेर नइ तो आय जिनगी,कर मया भरमार ओ।।

मोर हिरदे ला तहूँ,पखरा सहीं झन फोर ओ।
मँय दिवाना तोर हावँव,तँय दिवानी मोर ओ।

विष्णु पद छंद गीत(८६) 

*देखत हावँँव रस्ता तोरे,कब आबे सजना।*
तोर बिरह मा होगे हावय,निसदिन के तपना।।

टप-टप टप-टप नैना ले गा,आँसू हा बरसे।
तोला देखे बर सँगवारी,नैना हा तरसे।
अलथ-कलथ रतिहा ला काटौं,आथे बड़ सपना।
देखत हावँँव रस्ता तोरे,कब आबे सजना।।

आजा अब तँय मोर मयारू,दुख-पीरा हरले।
तोर मया मा जीयत हावँँव,सुरता तँय करले।।
तोर नाँव के होगे हावय,माला गा जपना।
*देखत हावँँव रस्ता तोरे,कब आबे सजना।।

बिन पानी के मछरी जइसे,कब ले मँय मरहूँ।
आके प्यास बुझादे जोही,सँउहे मँय तरहूँ।।
सुन्ना-सुन्ना लागे अब्बड़,मोर गली अँगना।
*देखत हावँँव रस्ता तोरे,कब आबे सजना।।

सार छन्द गीत(८७)
*वियोग श्रृंगार रस*

कोरोना जग बैरी होगे,कइसे मिलबो जोही ।
कब ले दुरिहा रहिबो राजा,छिन-छिन अंतस रोही।।

एक झलक देखे बर तोला,तरसत रहिथे चोला।
घर ले बाहिर कइसे निकलँव,बाहिर बरसे गोला।।
रोग बढ़े अब चारो कोती,कोन जनी का होही।
कोरोना जग बौरी होगे,कइसे मिलबो जोही।।

मया-मयारू बिन सुन्ना मन,सुन्ना हे दिन रतिया।
कइसे जीबो ए जिनगी ला,धधकत रहिथे छतिया।।
जुलुम करे हे कोन बिधाता,अउ कतका दुख बोही।
कोरोना जग बैरी होगे,कइसे मिलबो जोही।।

बरवै छंद गीत(८८)
*श्रृंगार रस*

गियाँ बिना नइ आवय,मोला चैन।
ऐती ओती खोजत,रहिथे नैन।।

अइसे लगथे होगे,गियाँ पराय।
कोन शहर मा जाके,कहाँ धँधाय।।
धधकत रहिथे चोला,लगगे आग।
गियाँ मिले बर छेड़य,मन हा राग।।
लटपट मा कटथे दिन,बिरहा रैन।
गियाँ बिना नइ आवय,मोला चैन।।

देखे बर अब रोवय,चोला मोर।
निरयइया हे लेवत,नइ हे सोर।।
अंतस मा अब छाये,ओखर रूप।
गियाँ बिना जग लागय,मोला कूप।।
सुरता आवय छिन-छिन,गुरतुर बैन।
गियाँ बिना नइ आवय,मोला चैन।।

लावनी छंद गीत नं.(८९)

तोर बिना मन नइ लागत हे,कब आबे तँय सँगवारी।
खड़े खड़े रद्दा जोहत हँव,आँखी फरकत हे भारी।।

छिन छिन आथे सुरता जोंही,मोर दरद ला मैं जानौं ।
मन नइ लागे कोनों कोती,तोही ला मितवा मानौं।।
सुरता तोर सताथे मोला,दिल मा चल जाथे आरी।।
तोर बिना मन नइ लागत हे,कब आबे तँय संगवारी।।

तोर दरश बर नैना रोवय,मन मा मोर बसाये हौं।
नैना के पुतरी मा तोला,काजर असन अँजाये हौं
अन पानी नइ भावय मोला,रहिथे थारी के थारी।
तोर बिना मन नइ लागत हे,कब आबे तँय सँगवारी।।

झन निरमोही बनबे जोंही,दया मया नइ हे तोला।
कइसे रहिथौं तोर बिना मँय,चूरत रहिथे ये चोला।।
आके दरश दिखा जा मैना,अभी मिले के हे पारी।
तोर बिना मन नइ लागत हे,कब आबे तँय सँगवारी।।

मया भुलावँव कइसे संगीअंतस मा तँय छाये हस,
नजर नज़र मा झूलत रहिथस,अब्बड़ मोला भाये हस।
तोर मया के पानी बिन ओ,सूखत हे मन के
बारी।।
तोर बिना मन नइ लागत हे,कबआबे तँय सँगवारी।।

लावनी गीत(९०)

तोर माथ के टिकली जोही,चंदा ला बिजरावत हे।
ऐती ओती चारो कोती,बजुरी ला चमकावत हे।।

तोर पाँव के पैरी गोई,छुनुर छुनुर बड़ बाजै ओ।
गुत्तुर गुत्तुर लागे अब्बड़,राग मया के साजै ओ।।
तोर रूप ला देखे बर ओ,सब मनखे सकलावत हे।
तोर माथ के टिकली जोही,चंदा ला बिजरावत हे।।

छाय घटा जस कारी चूँदी,जइसे बादर हारे ओ।
तोर नैन के कारी काजर,ठाढ़ कटारी मारे ओ ll
रूप मोहनी जादू मंतर,दुनिया ला भरमावत हे,
तोर माथ के टिकली जोही,चंदा ला बिजरावत हे।

कोन बिधाता रूप गढ़े ओ,पाये कंचन काया ला
गाँव गली मा शोर उड़त हे,बगराये तँय माया ला।।
काया हावय चंदन जइसे,महर महर ममहावत हे।
तोर माथ के टिकली जोही,चंदा ला बिजरावत हे।।

सार छन्द गीत(९१)

हमर मया के बँधना संगी,छोरे मा नइ छूटै।
जुग जुग रइही मया परित हा,टोरे मा नइ टूटै।।
*अंतरा*(१)
भले जमाना बैरी होवय,जिनगी संग पहाबो।।
मया दुवरिया मा सँगवारी,मिलके दीप जलाबो।
इहाँ जरइया मन के दिल हा,खपरा जइसे फूटै।
हमर मया के बँधना संगी,छोरे मा नइ छूटै।।
*अंतरा*(२)
ए दुनिया मा हमर मया के,रखबो बने चिन्हारी।
महकाबो दूनों सँगवारी,मया पिरित फुलवारी।।
जात-पात के भेद करइया,मनके दम हा घूटै।
हमर मया के बँधना संगी,छोरे मा नइ छूटै।।

सार छन्द गीत(९२)
*नायक*
मोर मया वाले तँय रानी,तोर हवँय मँय राजा।।
तोर मया के ए हिरदे  मा, बाजत हावय बाजा।।

अंतरा(१) *नायक*
नाँव लिखा ले तोर हाथ मा,मोर के नाँव गोरी।
जिनगी भर चिनहा जाही,बाँध मया के डोरी।
हमर मया ममहावत राहय,तइसे फूल खिलाजा।
मोर मया वाले तँय रानी,तोर हवँय मँय राजा।।

अंतरा(२) *नायिका*
मन मंदिर के मोर देवता,रोज तोर हे पूजा।
तोर सिवा गा ए हिरदे मा,नइ हे कोनो दूजा।।
सदा खुले हे तोर मया बर,हिरदे के दरवाजा।
तोर मया वाले मँय रानी,मोर हवस तँय राजा।।

ताटंक गीत (९३)
हमर मया के बगिया संगी,दुख मा अब मुरझाये हे।
कोन करम के फर ला संगी,इहाँ बिधाता लाये हे।।

अंतरा-(1)
कइसे तोला पाँवव बेटा,तँय आँखी के तारा गा।
तोर बिना ये जग अँधियारी,सुन्ना अँगना पारा गा।।
तोर बिना हम कइसे जीबो,तन-मन हा भरमाये हे।
हमर मया के बगिया संगी,दुख मा अब मुरझाये हे।

अंतरा-(2)
तहीं अँजोरी ये बगिया के,कुल के तँय हा हीरा गा।
तर-तर रोवत हावय नैना,अंतस मा हे पीरा गा।।
आज विधाता हमर करम मा,दुख पीरा बरसाये हे।
हमर मया के बगिया संगी,दुख मा अब मुरझाये हे।

अंतरा-(3)
किलकारी अब कोन सुनाही,मया दुवारी बगिया मा।
आगी जइसे लगगे हावय,भभकय बैरी छतिया मा।
कलपत हावय जिंवरा भारी,किस्मत रंग दिखाये हे।
हमर मया के बगिया संगी,दुख मा अब मुरझाये हे।

दोहा गीत(९४)
बन जा चंदा मोर तँय,बनँव सुरुज मैं तोर।
जुग जुग रहिबो संग मा,मया पिरित रस घोर।।

सात जनम ले संग ला,छोड़व नइ ईमान।
मया हवय अनमोल ओ,थोरक तो पहिचान।।
काय खवा के मोहनी,मन ला हर ले मोर...
बनजा चंदा मोर तँय,बनँव सुरुज मैं तोर...ll1

चीर करेजा देख ले,तब होही बिसवास।
ये जिनगी हे तोर बर,रखले जोही आस।।
तिहीं मोर ओ सुंदरी,करले नैना चार।
मया पिरीत ला जान के,जिनगी बने गुजार।।
मया अमर हे जान ले,छुटे मया नइ डोर...
बनजा चंदा मोर तँय,बनँव सुरुज मैं तोर...ll2

मया बिना का काम के,कतको कर सिंगार।
मया पिरित के छाँव मा,बइठे हवँय हजार।
अपन मयारू मान ले,होगे हवस जवान।
काया के दिन चार हे,काबर हस अंजान।।

ताटंक गीत(९५)

तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा।
का जादू का मंतर मारे,गुरतुर बोली बैना मा।।

आठो  पहरी सुरता आथे,सुधबुध ला भूला डारे।
बन भौंरा  कस माते रहिथौं,मया पिरित लहरा मारे।।
मोर हृदय मा बसके गोरी,दिखथस मन के ऐना मा
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा

मन बगिया के भौंरा मैं हा,चंपा तिहीं चमेली ओ।
कुहु कुहु कुहके मन बगिया मा,कोयल सही नवेली ओ।।
साँवरिया तैं अपन बनाले,गुनते रहिथँव रैना मा
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा

चंदा जइसे तोर रूप हे,मन मोरे मोहागे ओ।
अबड़ मया मैं करथौं गोरी,मोर हृदय मा छागे ओ।
कोन जनी का जादू डारे,ये पिंजरा के मैना मा
तोर रूप के हँव दीवाना,झुलथस हरदम नैना मा

छन्द गीत (९६)

मुटुर मुटुर बड़ देखे गोरी,कुलके बड़ अलबेली।
चिक्कन चिक्कन गाल हवय ओ,आँखी हे कजरेली।।

होठ तोर ओ लाली लाली,मुचमुच ले मुस्काये।
बोले गुरतुर गुरतुर बोली,बतरस ला बरसाये।।
फभे कान मा ढ़ार सोनहा,देखँय सबो सहेली।
चिक्कन चिक्कन गाल हवय ओ,आँखी हे कजरेली।

कारी चूँदी लहराये ओ,दाँत बरय जस हीरा।
देखे भर मा तोला गोरी,मोर मिटय सब पीरा।।
हरियर लुगरा लाल पोलखा,अंग अंग ला साजे।
तोर पाँव के पैरी गोरी,छुनुर छुनुर बड़ बाजे।।
गर मा पहिरे हार सोन के,देखाये बरपेली.....
चिक्कन चिक्कन गाल हवय ओ,आँखी हे कजरेली।

कंचन जइसन चमकत हावय,तोर गजब के काया।
चंदा घलो लजावत हावय,तोर देख के माया।।
कोन बिधाता गढ़े हवय ओ,कंचन काया पाये।
लगय चेहरा गोंदा फुलवा,मन बैरी ललचाये।।
तन अब्बड़ ममहावे गोरी,लागे फूल चमेली।
चिक्कन चिक्कन गाल हवय ओ आँखी हे कजरेली।

छन्द गीत(९७)

रूप गजब हे गोरी तोरे,चंदा घलो लजाये।
चटक मटक हे रेंगना जोही,कनिहा ला लचकाये।।1
उलहा पाना जइसन जोही,मन ला तँय डोलाये....
रूप गजब हे गोरी तोरे,चंदा घलो लजाये....

कोयल जइसन गुरतुर बोली,मन ला अब्बड़ भाये।
कारी नागिन चूंदी तोरे,कनिहा ले लहराये।।2
कनिहा करधन सोहत हावे,नैना बान चलाये....
रूप गजब हे गोरी तोरे,चंदा घलो लजाये....

माथा मा ओ टिकली सोहे, लाली होठ लगाये।
आँखी तोरे हिरनी जइसन,काजर बने अँजाये।।
कोन गढ़े हे तोला रानी,अंतस ला भरमाये....
रूप गजब हे गोरी तोरे,चंदा घलो लजाये....

तोर गोड़ के पइरी गोरी,छम छम गीत सुनाये।
हाथ बाँह मा कँगना चूरी,खनखन ओ खनकाये 
चमकत हावय कंचन काया,माया जाल फँसाये.
रूप गजब हे गोरी तोरे,चंदा घलो लजाये....

तोर हँसी मा फूल झरे ओ,महर महर महमाये।
होठ तोर ओ मधुरस लागय,रस धारा बरसाये।।
नाक कान के बाली नथनी,अब्बड़ ओ चमकये..
गजब रूप हे गोरी तोरे,चंदा घलो लजाये....

हवय गुलाबी लुगरा तोरे,अँचरा तँय लहराये।
मुड़ ला उघरा करके रेंगे,नखरा  ओ देखाये।।6
जादू मंतर मारे गोरी,काबर ओ तरसाये....
गजब रूप हे गोरी तोरे,चंदा घलो लजाये....

बरवै छन्द गीत(९८)
धनी बिना नइ आवय,मोला चैन।
सुरता मा अब रोवत,हावय नैन।।

अइसे लगथे होगे,धनी पराय।
दूर शहर मा जाके,कहाँ लुकाय।।
धधकत हावय छतिया,लग गे आग।
आस मिले के छेड़य,मन हा राग।।
सपना देखँव मँय हा,अब दिन रैन
धनी बिना नइ आवय,मोला चैन।

मन मन करथौं अब तो,मँय हा बात।
मया पिरित के होही,कब बरसात।
ये बिरहा मा निकलत,हावय जान।
आके दरश दिखा जा,अब बयमान।।
ए हिरदे हा खोजय,गुरतुर  बैन।
धनी बिना नइ आवय,मोला चैन।।

सार छन्द गीत(९९)
*नायक*
मोर मया वाले तँय रानी,तोर हवँय मँय राजा।।
तोर मया के ए हिरदे  मा, बाजत हावय बाजा।।

अंतरा(१) *नायक*
नाँव लिखा ले तोर हाथ मा,मोर के नाँव गोरी।
जिनगी भर चिनहा जाही,बाँध मया के डोरी।
हमर मया ममहावत राहय,तइसे फूल खिलाजा।
मोर मया वाले तँय रानी,तोर हवँय मँय राजा।।

अंतरा(२) *नायिका*
मन मंदिर के मोर देवता,रोज तोर हे पूजा।
तोर सिवा गा ए हिरदे मा,नइ हे कोनो दूजा।।
सदा खुले हे तोर मया बर,हिरदे के दरवाजा।
तोर मया वाले मँय रानी,मोर हवस तँय राजा।।

गीत(१००)
मात्रा भार-1212 1122 1212 22
*नायक*
मया के फूल गियाँ दिल मा ओ सजा लेबो।
नज़र  मिला  के  मया  गोठ गोठिया लेबो।

*अंतरा* (१)नायक
मया  के  डोर  मयारू  बने  लमाना हे।
हँसी खुशी ले मया डोर मा बँधाना हे।
मया-पिरत ला बने आज हम निभा लेबो।
मया के फूल गियाँ दिल मा ओ सजा लेबो।

*अंतरा*(२)नायक
मया रही ए जमाना भले जरय चाही।
डरन नहीं ओ जरइया हा देख का पाही।
तभो  खुशी  ले  बने  ज़िंदगी  पहा लेबो।
मया के फूल गियाँ दिल मा ओ सजा लेबो।

*अंतरा*(३) नायिका
पढ़े लिखे गा तहूँ अउ महूँ  पढ़े हावँव।
अपन बना के मया पा महूँ मया पावँव।
ए जात-पात के बाधा ला हम भगा लेबो।
मया के फूल पिया दिल चल खिला लेबो।।


द्वारिका प्रसाद लहरे"मौज"
बायपास रोड कवर्धा छत्तीसगढ़

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