ग़ज़ल
ग़ज़ल
वज़्न-1212 1122 1212 22
गुरू है वक़्त सही रास्ता बताता है
सबक सिखाके यही हौसला बढ़ाता है
असर दुआओं का उन पर जरूर है होता
बड़ों के पाँव में अपना जो सर झुकाता है
जो अहमियत ही न जाने कभी भी मेहनत की
कमाई पाप की अक़्सर वही उड़ाता है
हवस का दास बना फिरता है जो दुनिया में
वो खुद को हसरतों के जाल में फँसाता है
हमेशा दूर ही रहना है ऐसे इन्सां से
जो कल्ब-ए-"मौज" बहुत बेसबब दुखाता है
डी.पी.लहरे"मौज"
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