हमर मया के बगिया

गीत

(मुखड़ा)
हमर मया के बगिया संगी-2
दुख मा अब मुरझाये हे
कोन करम के फर ला संगी,
इहाँ बिधाता लाये हे।।

अंतरा-(1)
कइसे तोला पाँवव बेटा,
तँय आँखी के तारा गा।
तोर बिना ये जग अँधियारी,
सुन्ना अँगना पारा गा।।

(चढ़ान)
तोर बिना हम कइसे जीबो-2
(पटक)
तन-मन हा भरमाये हे..
हमर मया के बगिया संगी,
दुख मा अब मुरझाये हे...

अंतरा-(2)
तहीं अँजोरी ये बगिया के,
कुल के तँय हा हीरा गा
तर-तर रोवत हावय नैना,
अंतस मा हे पीरा गा।।2

(चढ़ान)
आज विधाता हमर करम मा-2
(पटक)
दुख पीरा बरसाये हे..
हमर मया के बगिया संगी,
दुख मा अब मुरझाये हे.

अंतरा-(3)
किलकारी अब कोन सुनाही,
मया दुवारी बगिया मा।
आगी जइसे लगगे हावय,
भभकय बैरी छतिया मा।

(चढ़ान)
कलपत हावय जिंवरा भारी-2
( पटक)
किस्मत रंग दिखाये हे..
हमर मया के बगिया संगी,
दुख मा अब मुरझाये हे...

गीतकार डी.पी.लहरे 
बायपास रोड़ कवर्धा

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