कान्हा रे..
गीत
(गायिका)
कान्हा रे तोर बंशी मा जादू भरे..
मोह डारे मन ला भिगोई डारे तन रे कइसे तैं काबू करे...ll2
(गायक)
राधा ओ तोर नैना मा जादू भरे..
मोह डारे मन ला भिगोई डारे तन ला ओ कइसे तैं काबू करे..ll2
(गायिका)-अंतरा(1)
जब-जब रे मैं तोला देखँव,
मया छावय घनघोर।
बंशी के धुन हा मया बढावय,
बंशी हावय चितचोर।।2
आजा रे मोर मनके मंजूर,दुनिया हा जर-जर मरे..
मोह डारे मन ला भिगोई डारे तन ला कइसे तैं काबू करे..
अंतरा-(2) गायक
जब-जब ओ मैं तोला देखँव,
मया के लागय पियास।
बंशी के धुन मा तोला बलावँव,
झन करबे मन ला उदास।।2
आजा ओ मोर मैना मंजूर,
जिनगी मा का हे धरे..
मोह डारे मन ला भिगोई डारे तन ला कइसे ओ काबू करे..
गायक+गायिका
कान्हा रे...
राधा ओ...
गीतकार
डी.पी.लहरे
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