गीत

गीत श्रृंगार 
(मुखड़ा)
तोर होंठ के लाली हाय-
तोर कान के बाली हाय-

तोर होंठ के लाली 
कान के बाली..बेनी मा मोंगरा के फूल ओ अलबेली दिवानी..
करेजा ल मारा थे ओ हूल..
करेजा ला मारथे ओ हूल...

अंतरा-1
खनर खनर ओ चूरी कंगना,
पांव  के पैरी झनके।
तोर बेनी के गजरा दौना,
महर महर ओ महके।।2
(चढ़)
हिरनी जइसे रेंगना गुंइयां-2
(पटक)
चाल हवय मतवाली..
तोर होंठ के लाली हाय
तोर कान के बाली हाय
चूंदी हा चंदैनी के रात ओ मनमोहनी दिवानी,,
नीक लागे तोर गोठ बात,,,

अंतरा-2
लाली लुगरा बेनी फुंदरा,
माथ म टिकली चमके।
कंचन जइसे काया गोरी,
रूप रंग हा दमके।।2

(चढ़)
तोर रूप के होवय चंदा-2
(पटक)
गांव गली मा चाली,,,
तोर होंठ के लाली हाय,
आँखी के कजरा कटार ओ अलबेली दिवानी,,
अंग-अंग बरखा बहार..
अंग-अंग बरखा बहार,,,

अंतरा-3
सजना संवरना मुच मुच हंसना,
लेवत हावय चैना।
मन ला लुभावय कोइली जइसे,
गुत्तुर हे तोर बैना।।2

(चढ़)
रूप मोहिनी जादू मंतर-2
(पटक)
अब्बड तैं दिलवाली,,
तोर होंठ के लाली हाय
तोर कान के बाली हाय,
गर मा हे सोनहा के हार ओ मनमोहनी दिवानी..
चाल रंगरेली कचनार...
चाल रंगरेली कचनार...

गीतकार 
डी.पी.लहरे 
बायपास रोड़ कवर्धा

Comments

Popular posts from this blog

लक्ष्मण मस्तुरिहा

छत्तीसगढ़ महतारी

मरिया भात..