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Showing posts from July, 2020

हमर मया के बगिया

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गीत (मुखड़ा) हमर मया के बगिया संगी-2 दुख मा अब मुरझाये हे कोन करम के फर ला संगी, इहाँ बिधाता लाये हे।। अंतरा-(1) कइसे तोला पाँवव बेटा, तँय आँखी के तारा गा। तोर बिना ये जग अँधियारी, सुन्ना अँगना पारा गा।। (चढ़ान) तोर बिना हम कइसे जीबो-2 (पटक) तन-मन हा भरमाये हे.. हमर मया के बगिया संगी, दुख मा अब मुरझाये हे... अंतरा-(2) तहीं अँजोरी ये बगिया के, कुल के तँय हा हीरा गा तर-तर रोवत हावय नैना, अंतस मा हे पीरा गा।।2 (चढ़ान) आज विधाता हमर करम मा-2 (पटक) दुख पीरा बरसाये हे.. हमर मया के बगिया संगी, दुख मा अब मुरझाये हे. अंतरा-(3) किलकारी अब कोन सुनाही, मया दुवारी बगिया मा। आगी जइसे लगगे हावय, भभकय बैरी छतिया मा। (चढ़ान) कलपत हावय जिंवरा भारी-2 ( पटक) किस्मत रंग दिखाये हे.. हमर मया के बगिया संगी, दुख मा अब मुरझाये हे... गीतकार डी.पी.लहरे  बायपास रोड़ कवर्धा

कान्हा रे..

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गीत  (गायिका) कान्हा रे तोर बंशी मा जादू भरे.. मोह डारे मन ला भिगोई डारे तन रे कइसे तैं काबू करे...ll2 (गायक) राधा ओ तोर नैना मा जादू भरे..  मोह डारे मन ला भिगोई डारे तन ला ओ कइसे तैं काबू करे..ll2 (गायिका)-अंतरा(1) जब-जब रे मैं तोला देखँव, मया छावय घनघोर। बंशी के धुन हा मया बढावय, बंशी हावय चितचोर।।2 आजा रे मोर मनके मंजूर,दुनिया हा जर-जर मरे.. मोह डारे मन ला भिगोई डारे तन ला कइसे तैं काबू करे.. अंतरा-(2) गायक जब-जब ओ मैं तोला देखँव, मया के लागय पियास। बंशी के धुन मा तोला बलावँव, झन करबे मन ला उदास।।2 आजा ओ मोर मैना मंजूर, जिनगी मा का हे धरे.. मोह डारे मन ला भिगोई डारे तन ला कइसे ओ काबू करे.. गायक+गायिका  कान्हा रे... राधा ओ... गीतकार  डी.पी.लहरे  बायपास रोड़ कवर्धा

गीत

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गीत श्रृंगार  (मुखड़ा) तोर होंठ के लाली हाय- तोर कान के बाली हाय- तोर होंठ के लाली  कान के बाली..बेनी मा मोंगरा के फूल ओ अलबेली दिवानी.. करेजा ल मारा थे ओ हूल.. करेजा ला मारथे ओ हूल... अंतरा-1 खनर खनर ओ चूरी कंगना, पांव  के पैरी झनके। तोर बेनी के गजरा दौना, महर महर ओ महके।।2 (चढ़) हिरनी जइसे रेंगना गुंइयां-2 (पटक) चाल हवय मतवाली.. तोर होंठ के लाली हाय तोर कान के बाली हाय चूंदी हा चंदैनी के रात ओ मनमोहनी दिवानी,, नीक लागे तोर गोठ बात,,, अंतरा-2 लाली लुगरा बेनी फुंदरा, माथ म टिकली चमके। कंचन जइसे काया गोरी, रूप रंग हा दमके।।2 (चढ़) तोर रूप के होवय चंदा-2 (पटक) गांव गली मा चाली,,, तोर होंठ के लाली हाय, आँखी के कजरा कटार ओ अलबेली दिवानी,, अंग-अंग बरखा बहार.. अंग-अंग बरखा बहार,,, अंतरा-3 सजना संवरना मुच मुच हंसना, लेवत हावय चैना। मन ला लुभावय कोइली जइसे, गुत्तुर हे तोर बैना।।2 (चढ़) रूप मोहिनी जादू मंतर-2 (पटक) अब्बड तैं दिलवाली,, तोर होंठ के लाली हाय तोर कान के बाली हाय, गर मा हे सोनहा के हार ओ मनमोहनी दिवानी.. चाल रंगरेली कचनार... चाल रंगरेली कचनार... गीतकार  डी.पी.लहरे...

https://youtu.be/MPk_hvyW4qo

https://youtu.be/MPk_hvyW4qo