कोरोना गीत
सरसी छंद गीत.
कोरोना के कोहराम से,कब होंगे आजाद।
पल-पल ये करता ही जाता,जन-जीवन बर्बाद।।
मचा हुआ है देखो कैसे,जग में हाहाकार।।
मानवता अब तार-तार है,कैसे हो उद्धार।।
हिन्दू-मुस्लिम सिख-ईसाई,करें संग फरियाद।
कोरोना के कोहराम से कब होंगे आजाद।।(१)
मुश्किल जीना हुआ जहां में,आफत में है जान।
लगा रोग कैसा ये देखो,मिलता नहीं निदान।।
समझ नहीं अब आये कुछ भी,बढ़ा हुआ अवसाद।।
कोरोना के कोहराम से,कब होंगे आजाद।।(२)
बदहाली का जीवन जीने,हम सब हैं मजबूर।
कोरोना के कारण अपने,अपनो से हैं दूर।।
कोरोना से कौन लड़े अब,यहाँ नहीं सहजाद
कोरोना के कोहराम से,कब होंगे आजाद ।(३)
द्वारिका प्रसाद लहरे"मौज"
कवर्धा छत्तीसगढ़
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