नानपन के सुरता

*नानपन के सुरता मनभावन*

कागज के जिहाद बनावन।
पानी मा डोंगा बोहवावन।
कूद-कूद तरिया मा नहावन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

टायर के चक्का दउडावन।
राजा-रानी खेल मतावन।
आनी-बानी पाना बटोरन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

पुतरी-पुतरा ला सम्हरावन।
बोइर कुट गटागट खावन।
चित्रहार के मजा उडा़वन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

रेस टिप मा बड़ मेछरावन।
फुगड़ी मा धुर्रा उड़वावन।
चिखला मा संगी घोंडावन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

चटनी बासी मन भर खावन।
पैठा-चौरा मा कुदरावन।
दाई के गारी मा चिचियावन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

बर पीपर मा झूल-झूल जावन।
लाईट गोल मा बड़ डर्रावन।
खेत के बेंदरा ला भगवावन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

बारी के खीरा ला चोरावन।
आमा-अमली ला झर्रावन।
संगी जहूरिया मन सकलावन।
नानपन के सुरता मनभावन।।

संगी मन संग गाना गावन।
चिखला पानी मा इतरावन।
बाँटी-भौंरा रोज चलावन।
बचपन के सुरता मन भावन।।

कतको रुखवा मा चघ जावन।
गिल्ली डंडा खूब भगावन।
पोरा मा पइसा लुकावन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

गाँव गली मा उधम मचावन।
झगरा मा कपड़ा चिरवावन।
घर मा आके गारी खावन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

नान्हे लइका ला बिजरावन।
भँइसा के पीठ मा चढ़ जावन।
खेल-खेल मा दिन पहावन।
नानपन के सुरता मन भावन।।

डी.पी.लहरे
कवर्धा छत्तीसगढ़

Comments

Popular posts from this blog

लक्ष्मण मस्तुरिहा

छत्तीसगढ़ महतारी

मरिया भात..