छप्पय छन्द


छप्पय छन्द

नारी तारनहार,निभाती सबसे नाता।
रखती सबका ध्यान,कहाती है जग माता।
करती है हर काम,सदा परिवार सँवारे।
नारी सुख की छाँव,आँगना स्वर्ग उतारे।।
नारी देवी रूप है,ममता है पहचान जी
ताड़नहारी ये नहीं,करना है सम्मान जी।।

डी.पी.लहरे
कवर्धा छत्तीसगढ़

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