लावणी छंद गीत

#आजादी_गीत

यह बातें बस कहने को है,मिली कहाँ आज़ादी है।
जात-पात में बँटा देश है,होता बस बर्बादी है।।

आजादी तो खतरे में है,
गली गली में रावन है।
तड़प रही है भारत माता,
कैसे कह दूँ पावन है।।

भेद-भाव ने ज़हर देश में,कैसी ये फैला दी है।
यह बातें बस कहने को है,मिली कहाँ आजादी है...ll1

मंदिर-मस्जिद गुरुद्वारों पे,
होती बहुत लड़ाई है।
हिन्दू-मुस्लिम सिख ईसाई,
लड़ते भाई-भाई हैं।।

बिलख रहे हैं रोटी पाने,
कहीं गरीबी छाई है।
रोजगार का पता नहीं है,
कैसी आफत आई है।।

गुंडागर्दी भ्रष्टाचारी,दिल में आग लगा दी है।
ये बातें बस कहने को है,मिली कहाँ आजादी है...ll2

जातिवाद का जाल बिछा है,
बढ़ती अब बीमारी है।
लूट मार से दुबकी बैठी
अब भी अबला नारी है।।

मानवता का नाम नहीं है,
नेह नज़र कब आता है।
आडम्बर का ढ़ेर लगा है,
क्या को?पूजा जाता है।।

अपराधी का जलवा देखो,गति पाती आबादी है।
ये बातें बस कहने को है,मिली कहाँ आजादी है...ll3

मालदार हैं चोर उचक्के,
ठनठन भाग्य विधाता है,
घर में देख भीड़ उन्मादी,
चिंतित भारत माता हैं।।

खेतों में अब खलिहानों में,
दिखती बस हरियाली है।
फाँसी झूल रहा किसान है,
छाई बस बदहाली है।।

जणगण मन अब कैसे गाएँ,छाती तो फ़ौलादी है..
ये बातें बस कहने को है,मिली कहाँ आजादी है...ll4

#गीतकार
#डी_पी_लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक-15-08-19

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