सार छंद गीत मया पिरित के बंधना
सार छंद गीत
मया पिरित के बँधना...
मया पिरित के बँधना मा ओ,
चल जोंही बँध जाबो।
सात जनम बर संगी बनके,
जिनगी सुघर बिताबो।।
कभू छुटे झन मोर मयारू,
मया पिरित के डोरी।
मया बिना हे जिनगी बिरथा,
मया बाँध ले गोरी।।
मया गीत ला चल सँवरेगी,
आज दुनों झन गाबो...
मया पिरित के बँधना मा ओ,
चल जोंही बँध जाबो...ll1
मोर मया धन दौलत हावय,
सुख के छइँहा पाबे।
राज कुमारी बनके रहिबे,
तन मन ला हरसाबे।।
पावन हावय मोर मया हा,
संगे मजा उड़ाबो....
मया पिरित के बँधना मा ओ,
चल जोंही बँध जाबो....ll2
मया बढ़ाले चल ओ गुँइया,
मँड़वा तहूँ गड़ाले।
बनके तँय रानी मँय राजा,
भाँवर संग पराले।।
चारे दिन के ये जिनगी हा,
जिनगी हमर बसाबो....
मया पिरित के बंधना मा ओ,
चल जोंही बँध जाबो....ll3
रचनाकार
डी.पी.लहरे
बायपास रोड़ कवर्धा
दिनाँक 7-5-19
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