किसानी गीत

किसानी गीत..

तँय गिर जाबे रे पानी,
खेती हे मोर जिनगानी-2
बरसा दे बरखा रानी,
मँय करथँव खेती किसानी-2

जाँगर टोर कमावत रहिथँव..2
माटी मोर से मोर मितानी..
तँय गिर जाबे रे पानी,
खेती हे मोर जिनगानी-2

मँय विधाता ये भुइयाँ के,
धान चना उपजाथँव-2
चटनी बासी खाके भइया,
माटी के गुन गाथँव-2

भरदे धनहा खेत खार ला..2
झन कर तँय मनमानी..
तँय गिर जाबे रे पानी,
खेती हे मोर जिनगानी-2

जाड़ा,गरमी का बरसात मा,
तर तर चुहे पछीना-2
करम ठठाये ला जी परथे,
हमला बारा महिना-2

बरसा करदे सावन आगे..2
झन कर आनाकानी..
तँय गिर जाबे रे पानी,
खेती हे मोर जिनगानी-2

शब्द रचना
डी.पी.लहरे
बायपास रोड कवर्धा
दिनाँक 27-12-18

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